JHAHIN/2014/58773

झारखंड में गहराया वित्तीय संकट: ₹18,060 करोड़ की विसंगतियों पर वित्त मंत्री सख्त

Spread the love

रांची। झारखंड में सरकारी धन के खर्च और वित्तीय अनुशासन को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच करीब ₹18,060 करोड़ की भारी-भरकम वित्तीय विसंगतियां और लंबित अंकेक्षण (ऑडिट) आपत्तियां पाई गई हैं। जनता की गाढ़ी कमाई के इस विशाल फंड का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं मिलने से राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सभी 24 विभागों के सचिवों की एक उच्चस्तरीय आपात समीक्षा बैठक बुलाई है।

विसंगतियों का मुख्य लेखा-जोखा

अंकेक्षण निदेशालय और वित्तीय समीक्षा रिपोर्टों के अनुसार, यह ₹18,060 करोड़ की लंबित राशि किसी एक मद की नहीं, बल्कि व्यापक प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। कुल ₹7,666 करोड़ की राशि सीधे तौर पर विभिन्न ऑडिट आपत्तियों के दायरे में है। लगभग ₹5,215 करोड़ रुपये ऐसे हैं जिन्हें सरकारी नियमों के तहत विभागों द्वारा वसूल किया जाना बाकी है।  सरकारी अधिकारियों या एजेंसियों को काम के लिए दिए गए अग्रिम पैसों में से ₹1,162 करोड़ का समायोजन (हिसाब) अब तक नहीं दिया गया है। रिपोर्ट में ₹78.06 करोड़ के सीधे गबन और ₹9.14 करोड़ के वित्तीय दुरुपयोग का भी संगीन जिक्र है। इसके अतिरिक्त, लगभग ₹3,930 करोड़ सरकारी खजाने में जमा कराए जाने अभी बाकी हैं।

दो दशकों का रिकॉर्ड टूटा

चौंकाने वाली बात यह है कि झारखंड गठन के बाद शुरुआती दो दशकों (2001 से 2022) तक यह लंबित बैकलॉग केवल ₹9,737 करोड़ था। लेकिन पिछले पांच वर्षों में यह राशि लगभग दोगुनी होकर ₹18,060 करोड़ पर पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि विभागों ने पूर्व में जारी सुधारात्मक दिशा-निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। खुद वित्त विभाग के अपने खातों में ही करीब ₹3,448 करोड़ का हिसाब पेंडिंग पाया गया है। नगर विकास, स्वास्थ्य, ऊर्जा और शिक्षा जैसे बड़े मंत्रालयों में लापरवाही सबसे ज्यादा है।

सख्त कदम और कार्रवाई की तैयारी

आगामी बैठक में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सभी विभागीय सचिवों से प्रक्रियात्मक देरी पर जवाब तलब करेंगे और कड़े वित्तीय अनुशासन को लागू करने का निर्देश देंगे। राज्य सरकार लीक हो रहे राजस्व को रोकने  और इस बकाया राशि की त्वरित रिकवरी के लिए एक विशेष समन्वय समिति का गठन भी कर सकती है। आईविजन इस वित्तीय अनियमितता के खुलासे और इसके बाद होने वाली विभागीय कार्रवाइयों पर लगातार नजर बनाए रखेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is Twister !!