17 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का किया ऐलान।
दुमका। दुर्गा पूजा और त्योहारों के जश्न में जहां पूरा देश डूबा है, वहीं सिस्टम की बेरुखी के कारण स्वास्थ्यकर्मियों के घरों में अंधेरा कर दिया है जो दिन-रात लोगों की जान बचाते हैं। जिले के काठीकुंड स्थित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मियों की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि उनके पास न तो बच्चों की स्कूल फीस भरने के पैसे हैं और न ही बीमार पड़ने पर खुद के इलाज के लिए।
12 महीने से है वेतन का इंतजार
काठीकुंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप-केंद्रों में काम करने वाले एएनएम , जीएनएम, लैब टेक्नीशियन और अन्य स्वास्थ्यकर्मी पिछले 12 महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। ये कर्मी शिवा प्रोटेक्शन फोर्स, बिरसा सिक्योरिटी फोर्स, बालाजी डिटेक्टिव और कमांडो हजारीबाग जैसी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए तैनात किए गए हैं। सिविल सर्जन (दुमका) को लिखे पत्र में कर्मियों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें साल 2025 (सितंबर से दिसंबर) और साल 2026 (जून से सितंबर) का वेतन अब तक नहीं मिला है।
बच्चों के स्कूल से आ रहे नोटिस, दवा के भी पैसे नहीं
प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को लिखे मांग पत्र में इन कर्मियों ने अपनी मार्मिक पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण वे भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। बच्चों की स्कूल फीस जमा न होने के कारण लगातार स्कूल से नोटिस आ रहे हैं। नौबत यहां तक आ गई है कि इन परिवारों के पास अपनी चिकित्सा और दवाओं के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। दशहरा पूजा पर इन्हें उम्मीद थी कि शायद उनका बकाया मानदेय मिल जाएगा, लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।
अधिकारियों का अमानवीय रवैया: “तुम लोग हमारे कर्मी नहीं हो“
इन कर्मियों का दर्द सिर्फ आर्थिक नहीं है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी है। जब ये थके-हारे और भूखे स्वास्थ्यकर्मी एमओआईसी काठीकुंड के पास अपने लंबित वेतन की गुहार लेकर जाते हैं, तो उन्हें दुत्कार दिया जाता है। कर्मियों का आरोप है कि उन्हें फटकार लगाते हुए कहा जाता है, “तुम लोग हमारे कर्मी नहीं हो”। सिस्टम के इस अमानवीय रवैये ने इन स्वास्थ्यकर्मियों को भीतर तक तोड़ दिया है।
17 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी
लगातार उपेक्षा और आर्थिक तंगी से टूट चुके दर्जनों आउटसोर्स कर्मियों (फार्मासिस्ट, एएनएम, जीएनएम, लैब टेक्नीशियन आदि) ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने सिविल सर्जन, दुमका और स्थानीय प्रशासन को लिखित सूचना दे दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं और लंबित वेतन का भुगतान नहीं हुआ, तो वे 17 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।
सिस्टम के लिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक मामला हो सकता है, लेकिन उन दर्जनों परिवारों के लिए यह जीवन और मृत्यु, सम्मान और अपमान का प्रश्न बन गया है। अब देखना यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद से जागेगा या इन स्वास्थ्यकर्मियों के घरों में इस बार दिवाली भी अंधेरे में ही मनेगी?















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