कोलकाता(विशेष संवाददाता)। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी की शाम हुई दिल दहला देने वाली भगदड़ के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। घटना के अगले ही दिन, रविवार सुबह कोलकाता पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूजा समिति प्रबंधन के 7 वरिष्ठ पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने, क्षमता से अधिक भीड़ को पंडाल में प्रवेश देने और गंभीर लापरवाही बरतने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है।
लापरवाही और कुप्रबंधन के लगे गंभीर आरोप
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में पूजा समिति की ओर से सुरक्षा व्यवस्था में कई बड़े लूपहोल्स (कमियां) सामने आए हैं। पंडाल में प्रवेश और निकास के लिए बनाए गए रास्ते बेहद संकरे थे। इसके अलावा, शनिवार शाम को जब अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हुई, तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वहां पर्याप्त संख्या में निजी सुरक्षा गार्ड या वॉलिंटियर्स मौजूद नहीं थे। पुलिस का कहना है कि यदि निकास द्वार (एग्जिट गेट) को मजबूत बनाया गया होता और भीड़ को टुकड़ों में अंदर भेजा जाता, तो 17 मासूम श्रद्धालुओं की जान बचाई जा सकती थी।
न्यायिक जांच के आदेश, पंडाल पूरी तरह सील
पश्चिम बंगाल सरकार के निर्देश पर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने आज सुबह ही चोरबागान पंडाल का दौरा किया और ढहे हुए निकास द्वार के मलबे से नमूने एकत्र किए। पंडाल को फिलहाल आम जनता और दर्शनार्थियों के लिए पूरी तरह सील कर दिया गया है। पुलिस सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही है ताकि यह साफ हो सके कि हादसे के वक्त पंडाल के भीतर और बाहर कुल कितने लोग मौजूद थे।
अस्पताल में घायलों की स्थिति और मुआवजा
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराए गए घायलों में से 5 की हालत अब भी अत्यंत नाजुक बनी हुई है, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने आज सुबह अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। सरकार ने मृतकों के आश्रितों के लिए घोषित मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद पूरे कोलकाता के अन्य सभी वीआईपी पूजा पंडालों में पुलिस बल की तैनाती दोगुनी कर दी गई है।
















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