मत्स्यजीवी समिति ने किया आयोजन, पर्यटक भी हुए शामिल, विलुप्त हो रही आदिवासी संस्कृति को बचाने का संकल्प

चांडिल। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत चांडिल बांध विस्थापित मत्स्यजीवी स्वावलंबी सहकारी समिति द्वारा प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी नौका विहार बोटिंग परिसर में बुढ़ी करम पर्व धूमधाम से मनाया गया। समिति के अध्यक्ष नारायण गोप, सचिव श्यामल मार्डी सहित सैकड़ों सदस्य और ग्रामीण मौजूद रहे।
समिति के सचिव एवं मांझी परगना महाल के महासचिव श्यामल माझी ने कहा – “आज बुढ़ी करम है। करमा पूजा से शुरू होकर आज जिहुड़ डाक के शुभ अवसर पर हम लोग खलिहान में पूजा करते हैं, नए धान लाकर पूजा की जाती है। आज से करमा का नृत्य बंद हो जाता है। इसके बाद दीपावली और सोहराय पर्व आएगा, सोहराय नाच होगा।”
उन्होंने कहा कि संथाल समाज के कई पारंपरिक नाच-गान जैसे दशई नाच, सोहराय नाच धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं। इसे बचाने और नई पीढ़ी को जागृत करने के लिए हम अपनी पुरानी पारंपरिक व्यवस्था, नाच-गान को फिर से जगा रहे हैं, लोगों को सिखा रहे हैं ताकि आदिवासी समाज के रीति-रिवाज लुप्त न हों।
इस अवसर पर दूर-दराज से पहुंचे पर्यटक भी बोटिंग करने आए और उन्होंने करम नृत्य में हिस्सा लिया। सैकड़ों महिला-पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य-संगीत का आनंद लिया।















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