प्रसिद्ध कलाकार शैलेश लोढ़ा एवं उनकी टीम देंगे प्रस्तुति
जमशेदपुर। आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहयोग देने के उद्देश्य से फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल्स सोसाइटी (एफटीएस), जमशेदपुर चैप्टर की ओर से एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत शनिवार, 24 अक्टूबर को शाम 5 बजे बिष्टुपुर स्थित नरभेराम स्कूल के कुसुम कमानी ऑडिटोरियम में पारिवारिक हास्य नाटक ‘डैड्स गर्लफ्रेंड्स’ का मंचन होगा। प्रसिद्ध कलाकार शैलेश लोढ़ा एवं उनकी टीम इस नाटक की प्रस्तुति देंगे। नाटक के लेखक एवं निर्देशक अतुल सत्य कौशिक हैं।
लगभग दो घंटे तक चलने वाले इस नाटक के माध्यम से दर्शकों को मनोरंजन के साथ ही एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य से जुड़ने का अवसर मिलेगा। संस्था का उद्देश्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए समाज के लोगों को आदिवासी बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा एकल विद्यालयों के संचालन के लिए सहयोग जुटाना है।
एफटीएस जमशेदपुर चैप्टर के पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के लिए सभी पास जारी किए जा चुके हैं। यह शहरवासियों के उत्साह और बच्चों की शिक्षा के लिए आयोजित इस सामाजिक पहल के प्रति उनके सहयोग को दर्शाता है।
देशभर में संचालित हो रहे लगभग 87 हजार एकल विद्यालय
फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल्स सोसाइटी एक सामाजिक संस्था है, जो ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले वंचित बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए कार्य करती है। संस्था के एकल विद्यालय कार्यक्रम के अंतर्गत दूरदराज के गांवों में एक शिक्षक के माध्यम से बच्चों को बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जहां शैक्षणिक सुविधाओं की उपलब्धता सीमित है।
संस्था से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, देशभर में लगभग 87 हजार एकल विद्यालय संचालित हो रहे हैं। वहीं, एफटीएस के जमशेदपुर चैप्टर के अंतर्गत लगभग 170 एकल विद्यालय चलाए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में बच्चों को बुनियादी शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है।
संस्था का मानना है कि शिक्षा के माध्यम से ही ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है, ताकि आर्थिक और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
















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