JHAHIN/2014/58773

बकाए वेतन की मांग को लेकर सांसद-विधायक के द्वार पहुंचे आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मी

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दुमका । काठीकुंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों में तैनात आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों के घरों में पिछले कई महीनों से गहरा आर्थिक अंधकार छाया हुआ है। विगत 12 महीनों से मानदेय का एक भी रुपया न मिलने के कारण इन कर्मियों के परिवारों के सामने अब दो वक्त की रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि आर्थिक तंगी की वजह से बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है और स्कूलों से लगातार नाम काटने की चेतावनियां मिल रही हैं। इतना ही नहीं, संकट के इस दौर में यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ जाए, तो उनके पास जीवनरक्षक दवाइयां और बुनियादी इलाज तक कराने के पैसे नहीं हैं। दशहरा जैसे बड़े त्योहारों पर भी इन्हें सिर्फ निराशा और आंसू ही हाथ लगे, जिसके बाद मजबूर होकर इन कर्मियों ने 17 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का रास्ता चुन लिया है। कई दिनों से जारी इस हड़ताल के बीच पीड़ितों ने न्याय के लिए अब जनप्रतिनिधियों का दरवाजा खटखटाया है।

खाली पेट और आंसुओं के बीच त्योहार बीता, मजबूरन शुरू हुआ कार्य बहिष्कार

लंबे समय से खाली जेब काम कर रहे इन आउटसोर्स कर्मियों को उम्मीद थी कि दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर प्रशासन उनका बकाया मानदेय जारी कर देगा। हालांकि, त्योहार बीत जाने के बाद भी जब सुध नहीं ली गई, तो इस असहनीय पीड़ा और भुखमरी से तंग आकर सभी कर्मी 17 अक्टूबर से हड़ताल पर चले गए। स्वास्थ्य व्यवस्था को अपनी सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से क्षेत्र की चिकित्सा सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

सांसद और विधायक से गुहार, जनप्रतिनिधियों ने दिया जल्द निदान का भरोसा

अपनी प्रशासनिक और आर्थिक लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए पीड़ित स्वास्थ्यकर्मियों ने दुमका के सांसद नलिन सोरेन से मुलाकात कर ज्ञापन दिया है और शिकारीपाड़ा के विधायक आलोक सोरेन के नाम ज्ञापन दिया है। शुक्रवार को कर्मियों ने दोनों जनप्रतिनिधियों को अपनी आपबीती सुनाते हुए एक मांग पत्र सौंपा। सांसद और विधायक ने उनकी दर्दनाक स्थिति और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य पर आए संकट को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द निदान निकालने के लिए शासन स्तर पर प्रयास करेंगे।

यह सभी पीड़ित कर्मचारी शिवा प्रोटेक्शन फोर्स रांची, बिरसा सिक्योरिटी फोर्स रांची, बालाजी डिटेक्टिव फोर्स रांची और कमाण्डो हजारीबाग जैसी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (काठीकुंड), प्रखंड विकास पदाधिकारी (काठीकुंड), सिविल सर्जन (दुमका) और पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन झारखंड को भी सूचनार्थ भेजी है। अब देखना यह है कि व्यवस्था की इस अनदेखी के खिलाफ आवाज उठाने वाले इन कर्मियों की गुहार पर कब तक कार्रवाई होती है।

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