राज्यपाल सह कुलाधिपति संभालेंगे अध्यक्ष पद की कमान, कुलपति को मिली उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
दुमका। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के कानूनी प्रावधानों के तहत विश्वविद्यालय की नई सीनेट परिषद का आधिकारिक गठन कर दिया गया है। कुलपति डॉ. कुनुल कांदिर के निर्देश पर जारी अधिसूचना 24 अक्टूबर 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो गई है। जनसंपर्क निदेशक डॉ. राजीव रंजन सिन्हा के मुताबिक, इस परिषद के गठन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय की प्रशासनिक, नीतिगत और अकादमिक गतिविधियों में समाज के हर वर्ग का व्यापक और पारदर्शी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। सीनेट में शामिल सभी मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल अगले तीन वर्षों के लिए होगा।
राजभवन की होगी सीधी निगरानी, कुलसचिव बने सदस्य सचिव
इस सर्वोच्च नीति-निधारक संस्था की कमान सीधे राज्य के राज्यपाल सह कुलाधिपति के हाथों में होगी, जो इसके अध्यक्ष होंगे। उनके सहयोग के लिए कुलपति को उपाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव को इस पूरी सीनेट का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा प्रशासनिक और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिकुलपति, वित्तीय सलाहकार, प्रॉक्टर, उच्च शिक्षा निदेशालय के विशेष प्रतिनिधि, अकादमिक डीन और छात्र कल्याण निदेशक को पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ शिक्षकों को मिली अहम जिम्मेदारी
विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अध्यक्षों और शिक्षकों को सीनेट में खास जगह दी गई है। विभागाध्यक्षों की श्रेणी में अर्थशास्त्र से डॉ. जे.के. साह, गणित से डॉ. एस.एन. अधिकारी, राजनीति विज्ञान से डॉ. बिजय कुमार, वनस्पति विज्ञान से डॉ. एस.एल. बॉन्डिया और संताली विभाग से डॉ. सुशील टुडू को जिम्मेदारी मिली है। वहीं शिक्षक प्रतिनिधियों के रूप में डॉ. अनिल कुमार वर्मा, डॉ. संजीव कुमार सिन्हा, डॉ. शर्मिला सोरेन, डॉ. अमीर हसन और डॉ. निर्मला त्रिपाठी को सदस्य नियुक्त किया गया है। अकादमिक काउंसिल की ओर से डॉ. संजय कुमार सिन्हा और डॉ. मेरी मारग्रेट टुडू भी सीनेट का हिस्सा बने हैं।
कर्मचारियों, छात्रों और जनप्रतिनिधियों की भी होगी मजबूत आवाज
विश्वविद्यालय के जमीनी स्तर के कर्मचारियों और छात्रों की बात सीनेट तक पहुंचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। गैर-शिक्षकेतर कर्मचारियों की श्रेणी में शांतिलता किस्कु, नेतलाल मिर्धा, परिमल कुंदन, देवाशीष लायक और मनीष सोरेन को नामित किया गया है। छात्रों के हितों की रक्षा के लिए विश्वविद्यालय छात्र परिषद के अध्यक्ष को सीधा प्रतिनिधित्व दिया गया है। साथ ही कुलपति द्वारा पांच पंजीकृत स्नातकों का चयन भी किया जाएगा। उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए क्षेत्र के पांच अंगीभूत और पांच संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों को भी इसमें शामिल किया गया है।
स्थानीय विकास और सामाजिक सरोकारों को जोड़ने के लिए दुमका क्षेत्र के सांसदों और संबंधित विधायकों को सीनेट की सदस्यता दी गई है। आने वाले समय में राज्य सरकार की ओर से समाज के दस प्रख्यात व्यक्तियों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के दो शीर्ष विशेषज्ञों को भी नामित किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की बेहतरीन नीतियों का सीधा लाभ मिल सकेगा।
















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