झाड़ग्राम। शारदीय दुर्गोत्सव समाप्त होने के बाद भी झाड़ग्राम जिले के बिनपुर-2 ब्लॉक के हाड़दा गांव में उत्सव की रौनक बनी हुई है। कोजागरी पूर्णिमा के अवसर पर यहां धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ विद्या की देवी मां सरस्वती की भी पूजा की जाती है। साहा और मंडल परिवारों की सदियों पुरानी परंपरा से शुरू हुई यह पूजा आज सामूहिक उत्सव का रूप ले चुकी है। पूजा के साथ लगने वाला जलेबी मेला भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
इस पूजा की खासियत यहां की प्रतिमा और उसकी पारंपरिक बनावट है। एक ही ढांचे पर बनी प्रतिमा में हल्की गुलाबी साड़ी में मां लक्ष्मी और श्वेत वस्त्रों में मां सरस्वती विराजमान रहती हैं। दोनों देवियों को बहनों के रूप में एक साथ पूजा जाता है। प्रतिमा के चालचित्र के शीर्ष पर पीतांबरधारी भगवान नारायण विराजते हैं, जबकि दोनों देवियों के आसपास चार सखियों की आकृतियां रहती हैं। स्थानीय भाषा में इन्हें ‘लुक-लुकानि’ कहा जाता है। हाड़दा में अब मां लक्ष्मी का स्थायी मंदिर बन चुका है। हर साल उसी पारंपरिक ढांचे में प्रतिमा तैयार की जाती है। कोजागरी पूर्णिमा से शुरू होने वाली पूजा प्रतिपदा की सुबह तक चलती है। इसके बाद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को घट विसर्जन और षष्ठी तिथि को प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। करीब 18 लाख रुपये के बजट से आयोजित पांच दिवसीय उत्सव में पर्यावरण अनुकूल आतिशबाजी का प्रदर्शन भी होता है। इसे देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग पहुंचते हैं।
















Leave a Reply