JHAHIN/2014/58773

UCC पर NDA के भीतर बढ़ी हलचल: अमित शाह के बयान के बाद JDU और लोजपा सतर्क, व्यापक चर्चा और ड्राफ्ट दिखाने की मांग

Spread the love

आईन्जन व्यूरो

नई दिल्ली: देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार के बढ़ते कदमों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाल में दिए गए बयान के बाद एनडीए के प्रमुख सहयोगी दलों ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) जैसे महत्वपूर्ण सहयोगियों ने इस कानून को बिना व्यापक आम सहमति और बिना ड्राफ्ट देखे आगे बढ़ाने पर चिंता व्यक्त की है।

JDU का रुख: बिना व्यापक चर्चा के लागू न हो UCC’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने इस मुद्दे पर बेहद सतर्क रुख अपनाया है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, JDU के वरिष्ठ नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का समय मांगा है। JDU का स्पष्ट कहना है कि भारत विविधताओं का देश है, जहाँ विभिन्न धर्मों, जनजातियों और समुदायों के अपने पारंपरिक कानून हैं। इसलिए, समान नागरिक संहिता जैसे बड़े बदलाव को लागू करने से पहले सभी हितधारकों, धार्मिक नेताओं और सहयोगी दलों के साथ एक मेज पर बैठकर व्यापक और गहन चर्चा होनी अनिवार्य है।

लोजपा की मांग: पहले दिखाया जाए ड्राफ्ट

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोजपा (रामविलास) ने भी UCC पर अपनी स्थिति साफ की है। पार्टी का कहना है कि वे सैद्धांतिक रूप से देश की एकता और कानून की एकरूपता के समर्थक हैं, लेकिन जब तक UCC का अंतिम ड्राफ्ट सामने नहीं आता, तब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता। लोजपा ने मांग की है कि सरकार पहले इस बिल का आधिकारिक मसौदा सहयोगियों के साथ साझा करे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे समाज के किसी भी तबके, विशेषकर अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कोई नुकसान न पहुंचे।

राजनीतिक सरगर्मी के मुख्य कारण

 गृह मंत्री के ताजा बयान के बाद इस बात की अटकलें तेज हैं कि सरकार आगामी संसद सत्र में UCC बिल पेश कर सकती है।

जेडीयू और लोजपा दोनों ही बिहार के बड़े राजनीतिक दल हैं, जहां सामाजिक और जातीय समीकरण बेहद मायने रखते हैं। दोनों दल किसी भी सूरत में अपने पारंपरिक और अल्पसंख्यक वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहते।

वहीं विपक्ष की तरफ से पहले ही इस कानून का पुरजोर विरोध किया जा रहा है, ऐसे में एनडीए के भीतर से उठ रही इन आवाजों ने सरकार के सामने आम सहमति बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

आगे की राह क्या होगी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के बावजूद सहयोगियों के भरोसे चल रही है, इसलिए वह UCC जैसे बड़े बिल पर सहयोगियों को दरकिनार करने का जोखिम नहीं उठाएगी। आने वाले दिनों में गृह मंत्रालय की ओर से एनडीए के घटक दलों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें ड्राफ्ट की बारीकियों को साझा कर उनके संशयों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *