आदित्यपुर। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच यदि बीते दौर की सादगी और ग्रामीण संस्कृति के दर्शन एक साथ हो जाएं, तो मन पुरानी यादों में खो जाता है।
कुछ ऐसा ही अनूठा और मनमोहक दृश्य इस वर्ष ‘आपजन क्लब’ के पूजा पंडाल में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2004 से लगातार पूजा का आयोजन कर रही यह संस्था इस बार श्रद्धालुओं को सीधे 80 और 90 के दशक के ग्रामीण जीवन से रूबरू करा रही है।
क्लब के अध्यक्ष एवं वार्ड 13 के पार्षद शांतनु घोष ने पंडाल के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि बदलती जीवनशैली के बीच हमारी पुरानी सांस्कृतिक विरासत और गांव का सहज रहन-सहन कहीं खोता जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमने 80-90 के दशक के ग्रामीण परिवेश, तत्कालीन बोलचाल और संस्कृति को पंडाल में जीवंत करने का प्रयास किया है। सबसे खास बात यह है कि बिना किसी बाहरी कारीगर की मदद के, कमेटी के ही होनहार युवकों ने दिन-रात एक कर खुद अपने हाथों से यह पूरा पंडाल और शो-पीस तैयार किया है। वहीं मां की मनोहारी प्रतिमा बांधा नगर के कारीगर द्वारा गढ़ी गई है। हम पूरे आदित्यपुर वासियों को इस अनुपम छटा को देखने का निमंत्रण देते हैं।’











Leave a Reply