1940 में समाजसेवियों ने शुरू की थी महाप्रसाद की परंपरा। सड़क पर बैठकर हजारों श्रद्धालु करते हैं महाप्रसाद ग्रहण।
चाकुलिया। चाकुलिया की पुराना बाजार सार्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी इस वर्ष 102 वें वर्ष दुर्गा पूजा आयोजित कर रही है। पाट (जूट) के पौधों की काठी से नौका की आकृति का भव्य पंडाल बना है। पंडाल में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के केवट की नाव से गंगा नदी पार करने की झलक दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल के चंदन नगर की आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। दुर्गा पूजा के दौरान विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
दशमी के हजारों श्रद्धालु करते है महाप्रसाद ग्रहण
यह कमेटी दशमी के दिन महाप्रसाद वितरण के लिए मशहूर है। दशमी के दिन 25 क्विंटल चावल, दाल और सब्जी की खिचड़ी महाप्रसाद के रूप में बनेगी। हजारों श्रद्धालु जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण करेंगे। महाप्रसाद वितरण की शुरुआत 1940 में यहां के समाजसेवियों ने जन सहयोग से की थी। आज भी यह परंपरा बरकरार है।
कमेटी के उपाध्यक्ष पतित पावन दास और सचिव अरिंदम दे उर्फ टुंपा दे ने बताया कि 1940 में दशमी के दिन महाप्रसाद वितरण की परंपरा शुरू हुई थी। तब यहां के समाजसेवी जगदीश प्रसाद रुंगटा, बनारसी लाल झुनझुनवाला, बाबूलाल केडिया समेत अन्य समाजसेवियों ने जन सहयोग से महाप्रसाद की शुरुआत की। यह परंपरा आज भी जारी है। महाप्रसाद के रूप में जन सहयोग से खिचड़ी बनती है और हजारों लोग सड़क पर बैठकर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। महाप्रसाद वितरण के दौरान यहां के कई समाजसेवियों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था की जाती है। महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए ग्रामीण इलाके से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने बताया कि दशमी के दिन 25 क्विंटल चावल, दाल और सब्जी की खिचड़ी और चटनी का महाप्रसाद के रूप में वितरण होगा। इसकी तैयारी में कमेटी के तमाम पदाधिकारी और सदस्य जुटे हैं।















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