अष्टमी तिथि को लेकर संशय के बावजूद उत्साह में नहीं आई कमी, चांडिल के शशानटांड़ मंदिर में दिखा मां चामुंडा का रूप, संधि पूजा में दी गई बलि
चांडिल। सरायकेला खरसावां में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर जिले के विभिन्न प्रखंडों में दुर्गा पूजा पूरे धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। महाअष्टमी के अवसर पर जिले के मंदिरों और पंडालों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
इस वर्ष महाअष्टमी की तिथि को लेकर थोड़ा संशय भी देखा गया। कुछ पूजा समितियों और पुरोहितों द्वारा रविवार को अष्टमी पूजा संपन्न कराई गई, तो कुछ स्थानों पर सोमवार को अष्टमी और संधि पूजा का आयोजन किया जा रहा है। तिथि के संशय के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।

चांडिल में 100 से अधिक पंडालों में पूजा
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में करीब 100 से अधिक मंदिरों और पंडालों में दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है। सोमवार सुबह विभिन्न मंदिरों में महाअष्टमी की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की गई।
शशानटांड़ के पुराने पेट्रोल पंप मंदिर में अनोखी परंपरा
चांडिल के शशानटांड़ (ओल्ड पेट्रोल पंप) स्थित देवी मंदिर में महाअष्टमी पर हर साल की तरह इस बार भी मां के चामुंडा रूप के दर्शन हुए। मान्यता के अनुसार संधि पूजा के दौरान मंत्रोच्चारण के बीच (कार्तिक सिंह सरदार की धर्म पत्नी) महिला पर मां दुर्गा की शक्ति का वास होता है, जो नृत्य करते हुए चामुंडा रूप में दिखाई देती हैं।
परंपरा के अनुसार इसी रूप में मां ने असुर का वध किया था। संधि पूजा के दौरान यहां बकरे की बलि देने की भी परंपरा है। इस दौरान महिला मिट्टी के पात्र (कोटरे) में बकरे के रक्त को लेकर नृत्य करते हुए उसका पान करती है। इस अलौकिक दृश्य को देख मंदिर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठता है।
भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मां दुर्गा की कृपा यहां हमेशा बनी रहती है।














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