JHAHIN/2014/58773

क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना गुनाह हो गया है, सवालों से क्यों घबराती हैं सरकारें?

आईविजिन व्यूरो लोकतंत्र की आत्मा सवालों पर टिकी होती है। नागरिक और पत्रकार जब सत्ता से बिना भय के प्रश्न…

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लोकतंत्र में संवाद की गुंजाइश खत्म, मजबूत होता लाठितंत्र

धर्मेंद्र कुमार लोकतंत्र की बुनियादी पहचान केवल पांच साल में एक बार मतदान करना नहीं है, बल्कि सरकार और व्यवस्था…

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