रांची। झारखंड का ऐतिहासिक और लोक आस्था का महान पर्व करम (करमा) पूरे राज्य में अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक उमंग के साथ मनाया जा रहा है। 22 सितंबर 2026 को मुख्य पूजा से पहले, समूचे प्रदेश में करम के पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम देखने को मिल रही है। राजधानी रांची सहित दुमका, जमशेदपुर और गिरिडीह के अखाड़ों में मांदर की थाप और पारंपरिक झूमर गीतों पर लोग देर रात तक थिरकते नजर आ रहे हैं।
राज्यपाल ने कटरमाली गांव में मनाया उत्सव
करम पूर्व संध्या के अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार रांची के बेड़ो प्रखंड अंतर्गत कटरमाली जरिया गांव पहुंचे। वहां उन्होंने ’10 पड़हा कटरमाली’ द्वारा आयोजित भव्य समारोह को संबोधित किया। प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा, “करम पर्व हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के अटूट रिश्ते का जीवंत प्रतीक है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते पर्यावरणीय संकट और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, प्रकृति संरक्षण का यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।” उन्होंने युवाओं से अपनी अनूठी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का भी आह्वान किया।
जावा जगाने की रस्म और भाई-बहन का अटूट प्रेम
यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और अच्छी फसल की कामना को समर्पित है। त्योहार को लेकर कुंवारी युवतियों में विशेष उत्साह है, जिन्होंने पूजा से पहले टोकरियों में ‘जावा’ (अनाज के पौधे) उगाए हैं। मुख्य पूजा के दिन अखरा में करम वृक्ष की डाल गाड़कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। झारखंड के कोने-कोने से आ रही तस्वीरें बयां कर रही हैं कि आधुनिकता के दौर में भी लोग अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से बेहद मजबूती से जुड़े हुए हैं। इस पावन अवसर पर पूरे राज्य के सरकारी स्कूलों में छुट्टी भी घोषित की गई है।















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