दुमका । गुरुवार को सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का 10वां दीक्षांत समारोह ऐतिहासिक उपलब्धियों और बड़े संकल्पों का गवाह बना। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष गंगवार, झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, कुलपति प्रो. (डॉ.) कुनुल कांडिर और कई शिक्षाविदों की गरिमामय मौजूदगी में यह भव्य कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर जहां उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 38 स्वर्ण पदक और 15 पीएचडी सहित हजारों उपाधियां प्रदान की गईं, वहीं छात्र हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की गई कि जो विद्यार्थी मुख्य प्रसाल में उपाधि प्राप्त नहीं कर सके, उन्हें उनके संबंधित महाविद्यालयों में विशेष औपचारिक समारोह आयोजित कर डिग्रियां दी जाएंगी।
समारोह में संताल हूल के नायकों सिदो, कान्हू, चांद, भैरव और फूलो-झानो के संघर्ष को याद करते हुए युवाओं को अपनी संस्कृति के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी गई। साथ ही, उपस्थित सभी लोगों को आगामी दीपावली और छठ महापर्व की शुभकामनाएं देते हुए देश में आपसी सद्भाव और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने का आह्वान किया गया।

दीक्षांत के मुख्य संदेश: नौकरी ही नहीं, जिम्मेदार नागरिक बनना है असली शिक्षा
समारोह में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सफल व्यक्ति बनना या नौकरी पाना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज में सकारात्मक योगदान देना है। युवाओं से अपील की गई कि वे अपने अर्जित ज्ञान को जीवन के अनुभवों में ढालें और नई चुनौतियों का डटकर सामना करें। इसके साथ ही, प्रत्येक उपाधि प्राप्त युवा से यह विशेष आग्रह किया गया कि वे समाज के कम से कम एक ऐसे व्यक्ति को साक्षर बनाने का संकल्प लें जो किन्हीं कारणों से शिक्षा से वंचित रह गया हो। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण और ‘वोकल फॉर लोकल‘ अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक हुनर व उद्यमियों को बढ़ावा देने में भी युवाओं की भूमिका पर बल दिया गया।
शोध, छात्रवृत्ति और प्रशासनिक सुधार: अनुसंधान का नया केंद्र बनता विश्वविद्यालय

यह विश्वविद्यालय अब धीरे-धीरे शोध और अनुसंधान के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां चालू शैक्षणिक सत्र में रिकॉर्ड 183 नए पीएचडी शोधकर्ताओं का नामांकन हुआ है, जिनमें कई नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र शामिल हैं। विश्वविद्यालय में अब ऐसे शोध को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई गई है जो कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसी स्थानीय समस्याओं के समाधान में सहायक हों। इसके अलावा, प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष से सिद्धो कान्हू फूलो स्मारक छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत प्रत्येक स्नातकोत्तर विभाग से एक मेधावी छात्र और एक छात्रा को छात्रवृत्ति दी जाएगी। विश्वविद्यालय के विकास को रफ्तार देने के लिए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2016 के तहत प्रशासन का पुनर्गठन करते हुए शोध, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी और प्लेसमेंट के लिए विशेष निदेशकों की नियुक्ति की गई है, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं (विशेषकर संथाली) और जनजातीय विद्यार्थियों तक उच्च शिक्षा पहुंचाने में मदद मिलेगी।













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