दुमका(संतोष झा) | पूरा सूबा आने वाले दीपोत्सव के स्वागत की रोशनी में नहा रहा है, ठीक उसी वक्त दुमका के काठीकुंड में दर्जनों परिवारों के आशियानों में पसरा घना अंधेरा सिस्टम की बेरुखी की गवाही दे रहा है। दूसरों के घावों पर मरहम लगाने और जिंदगी बचाने वाले हाथों की अपनी नसें अब भूख और लाचारी से सूखने लगी हैं। हड़ताल का आज आठवां दिन है, दुर्गा पूजा आंसुओं के घूंट पीकर बीत गई, और अब सामने खड़ी दीपावली और आस्था का महापर्व छठ भी भुखमरी की भेंट चढ़ने की कगार पर है।
पेट की आग और सिस्टम का पत्थर दिल: 8 से 12 महीने से नहीं मिली कौड़ी
काठीकुंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप-केंद्रों की रीढ़ कहे जाने वाले एएनएम, जीएनएम, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन पिछले 8 से 12 महीनों से पाई-पाई के मोहताज हैं।
आउटसोर्सिंग एजेंसियों शिवा प्रोटेक्शन फोर्स, बिरसा सिक्योरिटी फोर्स, बालाजी डिटेक्टिव और कमांडो हजारीबाग के जरिए अपनी जवानी और मेहनत खपाने वाले इन कर्मियों का साल 2025 (सितंबर से दिसंबर) और साल 2026 (जून से सितंबर) का पसीना फाइलों में कैद है। त्योहारों के नाम पर मिली तो बस खाली झोली और मायूस बच्चों के चेहरे।
बच्चों के बस्ते पर ताला, बीमार बुजुर्गों की सांसों पर पहरा
महीनों से फीस जमा न होने के कारण कर्मियों के मासूम बच्चों को स्कूल से निकाले जाने की नौबत है। घर-घर नोटिस पहुंच रहे हैं। दूसरों की पर्ची पर दवा लिखने और इंजेक्शन लगाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के अपने घरों में बीमार मां-बाप और बच्चे बिना दवा के तड़प रहे हैं। राशन दुकानदार अब उधार देने से हाथ खींच चुके हैं। दशहरा के दिन जहां घरों में पकवान बने, वहीं इन कर्मियों के चूल्हों से सिर्फ बेबसी का धुआं उठा।
अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अडिग: क्या जागेगा कुंभकर्णी प्रशासन?
लगातार उपेक्षा और जिल्लत की जिंदगी से तंग आकर इन कर्मियों ने 17 अक्टूबर से काम पूरी तरह ठप कर रखा है। अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार के 19वें दिन भी न तो जिले के आलाधिकारियों का दिल पसीजा है और न ही आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कानों पर जूं रेंगी है।
अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल दुमका के सिविल सर्जन और जिले के हुक्मरानों से है क्या दूसरों को जीवनदान देने वालों की सांसें यूं ही घुटती रहेंगी? क्या इस बार छठ के सूप और दिवाली के दीये इन घरों में जलेंगे, या फाइलों में दबे वेतन के इंतजार में दर्जनों जिंदगियां यूं ही तिल-तिल कर दम तोड़ देंगी?












Leave a Reply