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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: दिल्ली से बाहर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की छांव में रचा गया इतिहास, भारतीय सिनेमा का नया अध्याय

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आईविजन व्यूरो

एकता नगर (गुजरात): भारतीय सिनेमा के इतिहास में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (72nd National Film Awards) का आयोजन इस बार देश की राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन से बाहर, गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के भव्य परिसर में किया जा रहा हैष

यह पहला मौका है जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन दिल्ली की सीमाओं से बाहर किसी अन्य राज्य में किया गया है। इस कदम को भारतीय सिनेमा के विकेंद्रीकरण और देश की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

 दिल्ली से एकता नगर का सफर: क्यों खास है यह फैसला?

अब तक परंपरा रही है कि राष्ट्रपति द्वारा नई दिल्ली में विजेताओं को राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जाता रहा है। हालांकि, इस बार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस भव्य समारोह के लिए दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की पृष्ठभूमि को चुना।

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संदेश को सिनेमा के माध्यम से मजबूत करना है। सरदार वल्लभभाई पटेल की यह विशाल प्रतिमा देश की एकता का प्रतीक है, और भारतीय सिनेमा भी कश्मीर से कन्याकुमारी तक के कलाकारों और भाषाओं को एक सूत्र में पिरोता है।

 भव्यता का नया केंद्र: कैसा है आयोजन?

सरदार सरोवर बांध के किनारे बसे एकता नगर को इस महा-उत्सव के लिए पूरी तरह से सजाया गया है। समारोह स्थल पर भारतीय सिनेमा के 100 से अधिक वर्षों के सफर को दर्शाती एक विशेष डिजिटल प्रदर्शनी लगाई गई है। रेड कार्पेट पर केवल बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली, मराठी और असमिया सिनेमा के दिग्गज कलाकारों का जमावड़ा लगा हुआ है। इस आयोजन से गुजरात के इस प्रमुख पर्यटन स्थल को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली है, जिससे स्थानीय कला और शिल्प को बढ़ावा मिल रहा है।

नए भारत का नया सिनेमाई विजन

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का एकता नगर में होना केवल एक वेन्यू (स्थान) का बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक बदलते दृष्टिकोण का प्रतीक है। यह आयोजन इस बात की तस्दीक करता है कि भारतीय सिनेमा अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और देश के हर हिस्से को बराबर का सम्मान और मंच मिल रहा है। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास आयोजित यह शाम भारतीय फिल्म जगत के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है।

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