नई दिल्ली। देश के दवा बाजार और आम नागरिकों की सेहत से जुड़ी एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा जारी की गई ताजा मासिक रिपोर्ट में देश की 29 प्रसिद्ध दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में पूरी तरह फेल पाए गए हैं। इसी के साथ देश की राजधानी दिल्ली में ड्रग कंट्रोलर और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़े नकली दवा बनाने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश किया है। इस दोहरी कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय और पूरे फार्मास्युटिकल सेक्टर में हड़कंप मच गया है।
जांच में क्यों फेल हुए दवाओं के सैंपल?
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के अंतर्गत काम करने वाले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने देशभर के अलग-अलग राज्यों से रैंडमली दवाओं के सैंपल कलेक्ट किए थे। कड़े लैब टेस्ट के बाद जारी की गई ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ लिस्ट में 29 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन दवाओं में तय मानक के मुताबिक मुख्य साल्ट या जरूरी एक्टिव इंग्रीडिएंट्स मौजूद नहीं थे। इसका सीधा मतलब यह है कि मरीज यदि इन दवाओं का सेवन करते हैं, तो वे बीमारी पर बेअसर साबित होंगी। फेल होने वाली दवाओं में दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक (पेनकिलर्स), कैल्शियम सप्लीमेंट्स और ब्लड प्रेशर व शुगर की कुछ दवाएं शामिल हैं।
दिल्ली में नकली दवा गिरोह का पर्दाफाश
इसी बीच, दिल्ली-NCR क्षेत्र में सक्रिय एक हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है जो नामी-गिरामी फार्मा कंपनियों के रैपर और ब्रांड नेम का इस्तेमाल कर नकली दवाएं बाजार में सप्लाई कर रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान लाखों रुपये मूल्य की नकली दवाएं, खाली कैप्सूल, पैकेजिंग मशीनें और जाली होलोग्राम बरामद किए हैं। यह गिरोह सीधे थोक बाजारों के जरिए इन नकली दवाओं को ग्रामीण और छोटे शहरों के मेडिकल स्टोर्स तक पहुंचा रहा था।
स्वास्थ्य मंत्रालय सख्त, कंपनियों को नोटिस
इस गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी संबंधित दवा निर्माता कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही राज्यों के ड्रग इंस्पेक्टर्स को आदेश दिया गया है कि वे तुरंत इन 29 दवाओं के प्रभावित बैच को बाजार और मेडिकल स्टोर से वापस करवाएं।
आम जनता के लिए सलाह और लेबल वेरिफिकेशन
दवा खरीदते समय हमेशा उसके स्ट्रिप (पत्ता) की प्रिंटिंग क्वालिटी, स्पेलिंग और मैन्युफैक्चरिंग/एक्सपायरी डेट को ध्यान से देखें। मेडिकल स्टोर से हमेशा दवा का कंप्यूटराइज्ड पक्का बिल जरूर मांगें।














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