JHAHIN/2014/58773

डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन में ‘बैटल ऑफ द बुक्स’ का आयोजन

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जमशेदपुर। किताबें केवल पढ़ने और कहानियां जानने का माध्यम नहीं, बल्कि नई सोच विकसित करने, समस्याओं को समझने और उनके समाधान तलाशने का सशक्त माध्यम भी हैं। इसी विचार को रचनात्मक रूप देने के उद्देश्य से डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन की लाइब्रेरी द्वारा शनिवार को बहुउद्देशीय सभागार में ‘बैटल ऑफ द बुक्स’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम लाइब्रेरियन काजल कुमारी महतो एवं एंजल मुंडा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस वर्ष प्रतियोगिता की थीम “किताब से शार्क टैंक यानी किसी भी एक किताब से प्रेरित व्यावसायिक विचार प्रस्तुत करें” रही।

कार्यक्रम का संचालन अनमोल ने किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पुस्तकों से प्राप्त विचारों को केवल कहानी या जानकारी के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं, नए समाधान और संभावित व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया। कॉलेज की मेंटर डॉ. जूही समर्पिता ने जज के रूप में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का आकलन किया।

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किसी पुस्तक से प्राप्त सीख का उपयोग समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान के लिए कैसे किया जा सकता है। प्रस्तुतियों में वित्तीय जागरूकता, नए और मौलिक समाधान, छोटे स्तर पर किसी विचार को आजमाना, लोगों की आवश्यकताओं को समझना, कौशल को रोजगार से जोड़ना तथा आत्मनिर्भरता जैसे विषय प्रमुख रूप से सामने आए।

विद्यार्थियों की रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण, आत्मविश्वास, पुस्तकों से जुड़ाव और साहित्य के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। ‘द अल्टीमेट शार्क अवॉर्ड’ सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रस्तुति के लिए करीना कुमारी, ‘द पेज टर्नर अवॉर्ड’ पुस्तक से प्रभावी जुड़ाव के लिए अरुंधति गुप्ता को, ‘द पिच परफेक्ट अवॉर्ड’ सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतीकरण एवं आत्मविश्वास के लिए रीमा रॉय को, ‘द जजेज़ चॉइस अवॉर्ड’ जज की पसंद के लिए सुप्रीति दास को तथा ‘द बुकवर्म-प्रेन्योर अवॉर्ड’ साहित्य के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के लिए अंजलि मंडल को प्रदान किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज की सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन, सह सचिव सुधा दिलीप, प्राचार्या डॉ. मोनिका उप्पल  उप प्राचार्या डॉ. पामिला घोष दत्ता एवं शिक्षक गण के साथ ही सहायक सहकर्मी ने अपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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