नई दिल्ली। वैश्विक मंच पर भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता को लेकर भारत सरकार ने एक बार फिर अपना रुख बेहद स्पष्ट और सख्त कर दिया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रस्तावित नए विश्व मानचित्र में केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही दर्शाए जाने की मांग की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि देश की सीमाओं का कोई भी ‘गलत’ या ‘भ्रामक’ चित्रण किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।यह मामला संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हाल ही में पारित हुए उस ऐतिहासिक प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य विश्व मानचित्र पर महाद्वीपीय भूभागों (विशेष रूप से अफ्रीका) के सापेक्ष आकार को अधिक सटीकता से दर्शाना है। वैश्विक मानचित्रों में ऐतिहासिक विकृतियों को दूर करने वाले इस तकनीकी प्रस्ताव का नाम “करेक्ट द मैप” है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान तो किया, लेकिन साथ ही अपनी संप्रभुता से जुड़े राष्ट्रीय हितों को भी मजबूती से रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव किसी विशिष्ट राजनीतिक मानचित्र या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण को प्रमाणित नहीं करता है। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने भी यूएन में वोट की व्याख्या करते हुए दृढ़ता से दोहराया कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता ‘स्पष्ट, सुसंगत और गैर-परक्राम्य’ है। भारत का स्पष्ट स्टैंड है कि नई तकनीकों और तरीकों (जैसे Equal Earth map projection) को बढ़ावा देने के नाम पर देश के अभिन्न हिस्सों को मुख्य भूमि से अलग या विवादित रूप में नहीं दिखाया जा सकता।
UN में गरमाया ‘नक्शा विवाद’: भारत ने जताया कड़ा विरोध, कहा- आधिकारिक मैप ही मान्य











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