बेंगलुरु। भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की बढ़ती वैश्विक साख के बीच एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने इसरो को अपने महत्वाकांक्षी ‘मून बेस प्रोग्राम’ (Moon Base Program) में शामिल होने का एक बड़ा और औपचारिक न्योता दिया है। इस प्रस्ताव के बाद अब चांद की सतह पर भारत और अमेरिका के वैज्ञानिक एक साथ मिलकर मानव बस्तियों और शोध केंद्रों की नींव रखेंगे।यह ऐतिहासिक घोषणा बेंगलुरु में चल रहे स्पेस एक्सपो 2026 के दौरान की गई। भारत में अमेरिकी राजदूत ने इस बात की आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिका, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं का लोहा मानता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन चाहता है कि भारत इस मून बेस प्रोग्राम का एक अहम हिस्सेदार बने, ताकि भविष्य के चंद्र अभियानों को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।क्यों खास है यह न्योता?नासा का यह कदम भारत के चंद्रयान मिशनों, विशेषकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की ऐतिहासिक पहुंच की सफलता का परिणाम है। नासा अपने आर्टेमिस (Artemis) मिशन के तहत चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति और एक वैज्ञानिक बेस बनाने पर काम कर रहा है। इसरो के इस प्रोग्राम में शामिल होने से भारतीय वैज्ञानिकों को अत्याधुनिक अमेरिकी तकनीकों को साझा करने और गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) अभियानों में सीधे भाग लेने का मौका मिलेगा।यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक और वैज्ञानिक रिश्तों को एक नए मुकाम पर ले जाएगी, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष रेस में भारत की भूमिका को बेहद मजबूत कर देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसरो और नासा का यह मिलन आने वाले समय में मानव जाति के लिए चंद्रमा से जुड़े कई अनसुलझे रहस्यों को खोलने की चाबी साबित होगा।
नासा का इसरो को बड़ा न्योता: चांद पर अब साथ मिलकर करेंगे काम भारत और अमेरिका











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