JHAHIN/2014/58773

जमशेदपुर में मूसलाधार बारिश का कहर: पिछले 48 घंटों में रिकॉर्ड 160 मिलीमीटर से अधिक बारिश, उफान पर सुवर्णरेखा और खरकई; जनजीवन अस्त-व्यस्त

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आईविजन व्यूरो

जमशेदपुर। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव के कारण लौहनगरी जमशेदपुर और उसके आसपास के सरायकेला-खरसावां तथा पूर्वी सिंहभूम जिलों में पिछले तीन दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, समुद्र में बने लगातार निम्न दबाव के कारण आगामी 27 सितंबर तक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इस प्राकृतिक संकट को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है।

48 घंटों में 160mm से अधिक बारिश, उफान पर नदियां

मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में पिछले दो-तीन दिनों के भीतर रिकॉर्ड 160 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। इस मूसलाधार बारिश के चलते शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सुवर्णरेखा और खरकई दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है।

नदियों के बढ़ते रौद्र रूप को देखते हुए जिला उपायुक्त ने तटीय और निचले इलाकों (जैसे बागबेड़ा, शास्त्रीनगर, भुइयांडीह) में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने लाउडस्पीकर के माध्यम से मुनादी कराकर आम नागरिकों से नदियों के किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाने की सख्त अपील की है। एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीमों को चौबीसों घंटे तैनात रहने को कहा गया है।

विपदा में दिहाड़ी मजदूर: जीवन यापन का गहराया संकट

लगातार हो रही इस बेमौसम और भारी बारिश की सबसे क्रूर मार शहर के गरीब और रोज कमाने-खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ी है। निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो जाने और मंडियों में सन्नाटा पसरे होने के कारण रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। लगातार पानी बरसने की वजह से उन्हें पिछले तीन दिनों से कोई काम नहीं मिला है, जिससे उनके समक्ष दैनिक जीवन यापन का एक गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

फसलें बर्बाद, किसानों को भारी नुकसान और सब्जियों की किल्लत

ग्रामीण इलाकों और खेतों से आ रही खबरें बेहद परेशान करने वाली हैं। पटमदा, बोड़ाम और सरायकेला के खेतों में घुटनों तक पानी भर जाने की वजह से तैयार होने वाली सब्जियां और धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। खेतों में पानी जमा होने से फसलें गलने लगी हैं, जिससे स्थानीय किसानों को लाखों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

खेतों के जलमग्न होने का सीधा असर अब जमशेदपुर के शहरी बाजारों (जैसे साकची और बिष्टुपुर मंडी) में दिखने लगा है। बाजारों में स्थानीय सब्जियों की आवक (Supply) ठप हो जाने के कारण सब्जियों की भारी किल्लत हो गई है, जिसके चलते बची-कुची सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं और आम जनता की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है।

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