नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर भारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल का गवाह बना है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर आज सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाया और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सहित करीब 60 से 90 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है।
क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन?
यह विरोध प्रदर्शन देश के विभिन्न नागरिक संगठनों, विपक्षी दलों के कुछ गुटों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आह्वान पर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तुरंत बर्खास्त किया जाए। चुनाव प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो। भविष्य के चुनावों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पूरी तरह सुनिश्चित की जाए।
जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा बल तैनात, पुलिस की कार्रवाई
सुबह से ही जंतर-मंतर और उसके आस-पास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। माहौल को भांपते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को पहले ही तैनात कर दिया गया था। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी ताकि प्रदर्शनकारी संसद भवन या अन्य प्रतिबंधित वीवीआईपी इलाकों की तरफ मार्च न कर सकें।
जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया और नारेबाजी तेज की, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और झड़प भी देखने को मिली।
योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण हिरासत में
आंदोलन की अगुवाई कर रहे स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से आगे बढ़ने के दौरान हिरासत में ले लिया।
इस विरोध प्रदर्शन और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों ने दिल्ली की सियासत में उबाल ला दिया है। विपक्षी दलों ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को ‘दमनकारी’ करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने वालों को जेल में डालना चाहती है। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से बयान आया है कि किसी को भी कानून-व्यवस्था हाथ में लेने और राजधानी की शांति भंग करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।














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