मतदाता सूची में गड़बड़ी और परिसीमन के बहाने आदिवासी प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की साजिश के खिलाफ हुआ विरोध
महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर सख्त कार्रवाई, छात्रों को हक़ और स्थानीय युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता की मांग।

दुमका। झारखंड के दुमका स्थित ऐतिहासिक गांधी मैदान में आदिवासी मूलवासी एकता मंच के तत्वावधान में शनिवार को एक विशाल ‘लोकतांत्रिक रैली‘ का आयोजन किया गया। इस रैली में भारी संख्या में पहुंचे प्रबुद्ध नागरिकों, आदिवासियों, मूलवासियों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा का संकल्प लिया। रैली के माध्यम से संगठन ने मीडिया और सरकार के समक्ष राज्य के ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए छह प्रमुख मांगों का एक मांग पत्र जारी किया है।
मतदाता सूची और परिसीमन को लेकर गहरी चिंता
मंच ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण ग्रामीण, गरीब और विशेषकर आदिवासी समुदाय के वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने की आशंका है। इसके साथ ही, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर भी चिंता जताई गई है। मंच ने मांग की है कि परिसीमन की तकनीकी प्रक्रिया का इस्तेमाल आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पांचवीं व छठी अनुसूची के संवैधानिक संरक्षण को कमजोर करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 का विरोध
मंच ने केंद्र सरकार के ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026‘ का कड़ा विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। प्रतिनिधियों का आरोप है कि यह संशोधन झारखंड जैसे खनिज-संपन्न राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को चोट पहुंचाता है और खनिज अधिकारों पर राज्य सरकारों की शक्तियों को सीमित करता है। मंच ने मांग की है कि ग्राम सभाओं के अधिकारों की रक्षा की जाए और खनन प्रभावित स्थानीय समुदायों को उनके संसाधनों के प्रबंधन में निर्णायक भूमिका दी जाए।
महिलाओं की सुरक्षा और छात्रों के अधिकार
राज्य में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती यौन हिंसा की घटनाओं पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया गया। मंच ने इन मामलों की त्वरित व निष्पक्ष जांच करने, दोषियों को कड़ी सजा देने और शैक्षणिक संस्थानों व सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने की मांग की। इसके अलावा, आदिवासी और मूलवासी छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं, छात्रावासों की मरम्मत और छात्रवृत्ति व वजीफे का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और समाज से अपील
रैली में यह प्रमुखता से उठाया गया कि राज्य में खनन कंपनियों और उद्योगों का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन स्थानीय आदिवासी और मूलवासी युवा अक्सर रोजगार के अवसरों से वंचित रह जाते हैं। मंच ने मांग की है कि स्थानीय कंपनियों में यहां के युवाओं को भर्ती में उचित प्राथमिकता दी जाए और खनन कंपनियों को स्थानीय विकास के प्रति जवाबदेह बनाया जाए।
मंच ने अंत में झारखंड की जनता और सरकार से अपील की कि इस रैली में उठाए गए मुद्दे किसी एक समुदाय या धर्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पूरे झारखंड के भविष्य, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय से जुड़े हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से मतभेदों से ऊपर उठकर संवैधानिक मूल्यों, न्याय और भाईचारे की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।












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