रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के पिछड़ा वर्ग के युवाओं और छात्र-छात्राओं के हित में एक ऐतिहासिक और राहत देने वाला निर्णय लिया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार, ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र धारकों को अब हर साल नया सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। कार्मिक विभाग और पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग के नवीनतम दिशा-निर्देशों के तहत, कंडिका 8.2 एवं 9.1 के अनुसार अब सिर्फ फॉर्म-15 में एक स्व-घोषणा पत्र देकर पुराने एनसीएल प्रमाण पत्र के आधार पर ही आगामी नियुक्तियों और शैक्षणिक नामांकनों की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इस कदम से युवाओं को समय, धन और बार-बार होने वाली मानसिक व प्रशासनिक असुविधाओं से बड़ी मुक्ति मिलेगी। उक्त बात की जानकारी ओबीसी मोर्चा के मीडिया प्रभारी अशोक कुमार कुशवाहा ने देते हुए कहा कि
यह निर्णय राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष और मांग का परिणाम है। मोर्चा लगातार राज्य सरकार और आयोग के समक्ष यह मुद्दा उठा रहा था कि प्रमाण पत्र की वैधता केवल एक वर्ष होने से युवाओं को हर भर्ती और दाखिले के समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मोर्चा की इस न्यायसंगत मांग पर पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग ने 26 मई 2026 की बैठक में अपनी महत्वपूर्ण अनुशंसा भेजी थी, जिसे अब सरकार ने अमलीजामा पहना दिया है।
इस सफलता पर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार सहित पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव, सदस्यों और सचिव का विशेष आभार जताया है। इसके साथ ही, उन्होंने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि राज्य सरकार की तर्ज पर केंद्रीय नियोजन और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में भी ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र की वैधता के नियमों को सरल किया जाए, ताकि देश भर के ओबीसी युवाओं को हर चक्र में नया सर्टिफिकेट बनवाने की अनिवार्यता से हमेशा के लिए निजात मिल सके। सरकार के इस कल्याणकारी फैसले का राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समाज के विभिन्न प्रबुद्ध जनों ने व्यापक स्वागत किया है।












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