गिरिडीह से विधायक और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू (56) का शनिवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने से निधन हो गया। यह संयोग ही है कि हेमंत सोरेन सरकार के सत्ता में आने के बाद यह चौथे मंत्री का पद पर रहते हुए निधन है।
हेमंत सरकार के दूसरे कार्यकाल (2024-2029) के दूसरे वर्ष में यह दूसरी त्रासदी है। इससे पहले 2025 में शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का निधन हुआ था। वहीं 2023 में जगरनाथ महतो और उससे पहले अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का निधन हुआ था। लेकिन इन तीनों की तुलना में सुदिव्य सोनू सबसे सक्रिय, ऊर्जावान और मुखर चेहरे थे।
वे विपक्ष को तार्किक जवाब देने और जनता के बीच गहरी पैठ बनाने के लिए जाने जाते थे। हाल ही में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलनों के दौरान सरकार की ओर से संवाद का नेतृत्व उन्होंने ही किया था। शनिवार को शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद देर रात अचानक सीने में दर्द हुआ और गिरिडीह के मर्सी अस्पताल में डॉक्टरों के प्रयास विफल रहे।
सुदिव्य सोनू का जाना झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है। लगातार चार मंत्रियों का इस तरह पद पर रहते हुए निधन होना न केवल सरकार की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हर बार राजनीतिक विरासत परिवार के हाथों सौंपने की परंपरा और गहरी होती जा रही है।
सोनू का निधन विशेष रूप से पीड़ादायक है क्योंकि वे सरकार के सबसे मुखर और प्रभावी मंत्री थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और परिजनों को इस असहनीय आघात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।













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