नई दिल्ली। भारतीय हॉकी के इतिहास और उसकी पहचान से जुड़े एक बड़े विवाद पर आखिरकार विराम लग गया है। हाल ही में संपन्न हुए FIH हॉकी विश्व कप 2026 के दौरान टीम की नई ‘भगवा’ (ऑरेंज) जर्सी को लेकर मचे भारी हंगामे और पूर्व दिग्गजों के तीखे विरोध के बाद हॉकी इंडिया (HI) ने अपना फैसला बदल दिया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने जा रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत की पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमें एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक और पारंपरिक नीली (ब्लू) जर्सी में मैदान पर उतरेंगी।
हॉकी इंडिया ने इस बड़े फैसले की आधिकारिक जानकारी भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को सौंप दी है। हालांकि, विवादों में रही भगवा जर्सी को पूरी तरह से बाहर नहीं किया गया है, बल्कि इसे टीम की सेकेंडरी (वैकल्पिक) किट के तौर पर सुरक्षित रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर खिलाड़ी इसका इस्तेमाल कर सकें।
क्यों बदला गया था रंग और क्यों हुआ विरोध?
दरअसल, नीदरलैंड्स और बेल्जियम में खेले गए वर्ल्ड कप से ठीक पहले हॉकी इंडिया ने नीली जर्सी को हटाकर भगवा रंग को प्राइमरी किट बना दिया था। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि नीले रंग के सिंथेटिक टर्फ (मैदान) पर नीली जर्सी पहनने से खिलाड़ियों को आपस में एक-दूसरे को देखने और गेंद को पास करने में दृश्यता (विजिबिलिटी) की समस्या आ रही थी।
लेकिन जर्सी लॉन्च होते ही खेल जगत में असंतोष फैल गया। भारत के पूर्व दिग्गज कप्तानों धनराज पिल्लै, वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह और अजीत पाल सिंह ने इस बदलाव की कड़ी आलोचना की थी। पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 1928 में भारत के ओलंपिक डेब्यू के समय से ही ‘नीला रंग’ भारतीय हॉकी की विरासत और मूल पहचान रहा है, इसे बदलना तर्कहीन है। देखते ही देखते इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था, जहां विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सरकार को घेरा था।
अध्यक्ष दिलीप तिर्की की ‘इनसाइड स्टोरी’
इस विवाद पर हॉकी इंडिया के भीतर भी आपसी खींचतान देखने को मिली थी। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी दिलीप तिर्की ने स्पष्ट किया कि नारंगी जर्सी को कभी भी स्थायी रूप से नहीं अपनाया गया था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वर्ल्ड कप के दौरान जर्सी का रंग बदलने का निर्णय हॉकी इंडिया के निर्वाचित नेतृत्व और कार्यकारी बोर्ड की सहमति के बिना लिया गया था।
दिलीप तिर्की ने मीडिया से बातचीत में कहा, “जब आईओए ने हमसे एशियन गेम्स के लिए टीम किट की पहली पसंद पूछी, तो हमने बिना किसी संशय के नीले रंग को पहली प्राथमिकता और नारंगी को दूसरी प्राथमिकता दी।”
एशियन गेम्स पर टिकी निगाहें
विश्व कप 2026 में भारतीय पुरुष टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और वह आठवें स्थान पर रही थी, जबकि महिला टीम पांचवें स्थान पर रही। अब नीली जर्सी में वापसी के साथ दोनों टीमों का पूरा ध्यान एशियन गेम्स 2026 पर है, क्योंकि यह टूर्नामेंट महाद्वीपीय प्रतिष्ठा के साथ-साथ 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए डायरेक्ट क्वालिफिकेशन हासिल करने का सबसे महत्वपूर्ण जरिया है। भारतीय प्रशंसक भी अपनी पसंदीदा ‘मेन इन ब्लू’ को उनके असली रंग में देखने के लिए पूरी तरह तैयार है।













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