आईविजन व्यूरो
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को राज्य सीआईडी और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई 121, कालीघाट रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास से की गई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके कुछ ही घंटों बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
क्यों हुई गिरफ्तारी और क्या है पूरा मामला?
सुमित रॉय की गिरफ्तारी का सीधा संबंध साल्बोनी (पश्चिम मिदनापुर) और झाड़ग्राम में हुए बहुचर्चित सरकारी जमीन घोटाले से है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि स्थानीय राजनीतिक नेताओं और रसूखदार लोगों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों के फर्जी डीड (दस्तावेज) तैयार किए गए और उन्हें अवैध रूप से बेचा गया। इस अवैध सौदेबाजी से मिले पैसों को राजनीतिक फंड के रूप में इस्तेमाल करने का भी आरोप है। जांच के दौरान सुमित रॉय के बैंक खातों में 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले हैं, जिसके बाद सीआईडी ने उनसे पूछताछ के लिए हिरासत की मांग की थी।
बंगाल के उपचुनावों पर क्या पड़ेगा इसका असर?
राज्य में आगामी विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले हुई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। जहां विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इसे भाजपा की “बदले की राजनीति” बता रही है।
राज्य के मुख्यमंत्री व गृह मंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए सुमित रॉय को “नंबर वन जबरन वसूलीबाज“ करार दिया है। बीजेपी इस मुद्दे को भुनाकर टीएमसी सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर रही है, जिससे चुनाव में सत्तापक्ष बैकफुट पर आ सकता है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस पार्टी का कहना है कि अभिषेक बनर्जी के विदेश (आंखों के इलाज के लिए अमेरिका) जाते ही यह कार्रवाई केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने और उपचुनावों में वोटरों को प्रभावित करने के लिए की गई है।
कुल मिलाकर, इस गिरफ्तारी ने उपचुनावों की जंग को पूरी तरह से ‘भ्रष्टाचार बनाम राजनीतिक प्रतिशोध’ के नैरेटिव में बदल दिया है, जिससे चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और आक्रामक होने की उम्मीद है।













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