गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिला अंतर्गत पचम्बा इलाके से मानवता को झकझोर देने वाली एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। जहां एक कलयुगी मां ने लोक-लाज या किसी अज्ञात मजबूरी के डर से अपनी कोख से जन्मे एक दिन के मासूम नवजात को सड़क किनारे तीखे कांटों से भरी गहरी झाड़ियों में मरने के लिए छोड़ दिया। लेकिन कहते हैं ना कि ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय।
कांटों के बीच से आई सिसकियों ने पिघलाया दिल
घटना पचम्बा थाना क्षेत्र की है, जहां सड़क से करीब पांच फीट नीचे घनी और नुकीली झाड़ियों में से किसी मासूम के बिलखने की आवाज आ रही थी। राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों ने जब करीब जाकर देखा, तो उनकी रूह कांप गई। एक नन्हा सा फरिश्ता बिना कपड़ों के, भूख और कड़ाके की ठंड से कांपते हुए तड़प रहा था। झाड़ियों के तीखे कांटों की वजह से मासूम के चेहरे, नाजुक बदन और आंखों के पास गहरे जख्म व खरोंच उभर आए थे। कांटों की भयावहता देख एक पल के लिए कोई भी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
खाकी का मानवीय चेहरा: कांटों में उतरकर बचाई जान
सूचना मिलते ही पचम्बा थाना प्रभारी राजीव कुमार अपनी टीम के साथ फौरन मौके पर पहुंचे। परिस्थिति की गंभीरता और मासूम की लगातार टूटती सांसों को देख उन्होंने बिना एक पल गंवाए खुद कांटेदार झाड़ियों में उतरने का फैसला किया। कांटों की परवाह किए बिना उन्होंने बेहद सावधानी से लहूलुहान नवजात को अपनी गोद में समेटा। जब खाकी वर्दी वाले उस ‘मसीहा’ ने बच्चे को सीने से लगाया, तो मानो उस अभागे बच्चे को मां की गोद जैसा अहसास मिल गया।
इलाज जारी, जांच में जुटी पुलिस
थाना प्रभारी ने बिना वक्त गंवाए अपनी गाड़ी से नवजात को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की विशेष देखरेख में उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, समय रहते अस्पताल लाने से बच्चे की जान बच गई है और वह अब सुरक्षित है। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद जहां पूरा इलाका उस निर्दयी मां को कोस रहा है, वहीं थाना प्रभारी की इस अद्वितीय संवेदनशीलता और बहादुरी को लोग सलाम कर रहे हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि आखिर इस फूल जैसे बच्चे को तड़पने के लिए किसने छोड़ दिया।













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