नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर सुरक्षा और पैसेंजर-हैंडलिंग सिस्टम में एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली चूक का मामला सामने आया है। यहां तीन इतालवी (Italian) नागरिक बिना अनिवार्य इमिग्रेशन क्लीयरेंस कराए ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान के जरिए भारत से म्यूनिख (जर्मनी) के लिए रवाना हो गए। इस सुरक्षा चूक की भनक लगते ही सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए एक आपात बैठक बुलाई है, वहीं नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरी घटना?
यह पूरी घटना 4 सितंबर 2026 की तड़के की है। इटली के तीन नागरिक—सुरजीत सिंह, बलविंदर कौर और गुरदेव सिंह—पंजाब के अमृतसर से एअर इंडिया की डोमेस्टिक कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए रात करीब 12:50 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे थे।
अमृतसर एयरपोर्ट पर ही इन यात्रियों को दिल्ली तक के लिए ‘घरेलू बोर्डिंग पास और आगे दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली लुफ्थांसा की कनेक्टिंग फ्लाइट का बोर्डिंग पास एक साथ दे दिया गया था।
सुरक्षा तंत्र में कहां हुई बड़ी चूक?
नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, चूंकि यह यात्रा एअर इंडिया के पारंपरिक ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के तहत नहीं आती थी, इसलिए इन यात्रियों को दिल्ली उतरने के बाद अराइवल एरिया से बाहर आकर अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान में जाना था और वहां अनिवार्य इमिग्रेशन जांच पूरी करनी थी।
जबकि दिल्ली एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टाफ की लापरवाही के चलते इन यात्रियों को सीधे ‘इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल’ ट्रांसफर एरिया में भेज दिया गया। यह एरिया केवल उन विदेशी यात्रियों के लिए होता है जो सीधे विदेश से आकर दूसरी विदेशी फ्लाइट पकड़ते हैं और जिन्हें भारतीय इमिग्रेशन काउंटर से गुजरने की जरूरत नहीं होती। इस प्रक्रियागत चूक के कारण तीनों इतालवी नागरिक बिना किसी पासपोर्ट या वीजा जांच के सीधे बोर्डिंग गेट तक पहुंच गए और लुफ्थांसा के विमान में बैठकर म्यूनिख के लिए उड़ान भर ली।
सरकार का बड़ा एक्शन: गृह मंत्रालय की आपात बैठक और नोटिस
इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन बाईपास होने की घटना को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ माना है। इस पर त्वरित कार्रवाई की गई है। इस संबंध में गृमंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में आपात बैठक की गई वहीं एयर इंडिया को नोिस किया गया।
क्यों गंभीर है यह मामला?
किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्री का बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस के देश छोड़ना बेहद गंभीर माना जाता है। इमिग्रेशन काउंटर पर ही यह जांचा जाता है कि देश से बाहर जाने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से यात्रा के योग्य है या नहीं, या वह किसी आपराधिक मामले में वॉन्टेड (भगोड़ा) या लुकआउट नोटिस के दायरे में तो नहीं है। तीनों यात्रियों के म्यूनिख पहुंचने के बाद अब यह जांच की जा रही है कि यह महज एक मानवीय भूल थी या इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश थी।













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