रांची। राजधानी रांची के बिरसा चौक और इसके आसपास के इलाकों (मामा नगर एवं एचईसी बाईपास रोड) में जिला प्रशासन और रांची नगर निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने हिंसक रूप ले लिया। करीब 10 बुलडोजरों के साथ एचईसी और रेलवे की सरकारी जमीन को खाली कराने पहुंची टीम को स्थानीय निवासियों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। इस दौरान भड़की झड़प को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें एक युवती सहित कई लोग घायल हो गए हैं।
महिलाओं ने घेरा बुलडोजर, तीखी झड़प
अभियान की शुरुआत होते ही वर्षों से वहां रह रहे सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध का नेतृत्व मुख्य रूप से स्थानीय महिलाओं ने किया, जो कार्रवाई का विरोध करते हुए जेसीबी मशीनों के आगे लेट गईं और बुलडोजर को घेर लिया। जब पुलिस बल ने उन्हें हटाने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाता देख पुलिस ने बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
तीज त्योहार के तुरंत बाद कार्रवाई से आक्रोश
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें अपना सामान सुरक्षित निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया। महिलाओं ने रोते हुए बताया कि हरितालिका तीज व्रत के तुरंत बाद बिना किसी ठोस पूर्व सूचना या नोटिस के उनके घरों को ढहा दिया गया। बेघर हुए लोगों के सामने अब इस बरसात के मौसम में सिर छिपाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मुख्य मांग: “पहले पुनर्वास, फिर विस्थापन”
बस्ती बचाओ संघर्ष समिति और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि सरकार और प्रशासन उन्हें उजाड़ने से पहले वैकल्पिक जमीन या पुनर्वास की उचित व्यवस्था करे। लोगों का कहना है कि वे पिछले 25 से 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके पास रोजगार का दूसरा कोई साधन नहीं है।
यातायात पूरी तरह ठप
इस बवाल और विरोध प्रदर्शन के कारण बिरसा चौक से लेकर सैटेलाइट चौक तक की मुख्य सड़क पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा। सुबह के पीक ऑवर्स में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता और दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इलाके में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने भारी मात्रा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर रखा है।













Leave a Reply