उज्जैन। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर उज्जैन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग का एक बेहद खौफनाक चेहरा सामने आया है। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के मद्देनजर चल रहे सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत, जब रविवार रात प्रशासन और मस्जिद कमेटी की आपसी सहमति से शाही मस्जिद के एक आंशिक हिस्से (लगभग 3 फीट) को स्वेच्छा से हटाया जा रहा था, ठीक उसी समय डिजिटल दुनिया में रची गई एक खतरनाक साजिश ने जमीनी स्तर पर भारी उपद्रव खड़ा कर दिया।
अफवाह का डिजिटल जाल और हिंसा का तांडव
उज्जैन पुलिस के अनुसार, कुछ असामाजिक और शरारती तत्वों ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर मस्जिद को पूरी तरह जमींदोज करने का एक फर्जी और भ्रामक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इंटरनेट पर फैले इस डीपफेक वीडियो और भड़काऊ पोस्ट्स को सच मानकर देखते ही देखते हजारों की संख्या में आक्रोशित लोगों की भीड़ शाही मस्जिद के पास जमा हो गई।
अफवाहों से उद्वेलित भीड़ ने मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों और जेसीबी मशीनों पर अचानक भारी पथराव शुरू कर दिया। हालात को बेकाबू होते देख पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।
पुलिस का बड़ा खुलासा और कानूनी हंटर
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रदीप शर्मा ने आधिकारिक बयान में साफ किया कि मस्जिद कमेटी और स्थानीय प्रबुद्ध जनों की बैठक में केवल आगे का कुछ हिस्सा हटाने पर सहमति बनी थी। लेकिन एआई द्वारा निर्मित फर्जी वीडियो में पूरी मस्जिद को टूटते हुए दिखाकर युवाओं और नागरिकों को गुमराह किया गया।
डिजिटल दंगे की इस साजिश को नाकाम करने के लिए साइबर सेल और स्थानीय थानों ने मिलकर एक बड़ा क्रैकडाउन शुरू किया है। विभिन्न थानों में अब तक 8 से 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इस साजिश में कुल 20 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से 15 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अफवाह फैलाने वाले 5 प्रमुख सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स की पहचान कर उन पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस और साइबर टीमें 100 से अधिक इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स की कड़ाई से जांच कर रही हैं।
तकनीक के दुरुपयोग पर बढ़ी चिंता
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि एआई और डीपफेक तकनीक अब कानून-व्यवस्था के लिए कितना बड़ा सुरक्षा जोखिम बन चुकी हैं। फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए पूरे इलाके में करीब 2,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर आने वाले किसी भी असंपादित वीडियो को साझा न करें और शांति बनाए रखें।
















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