रांची। झारखंड अलग राज्य के निर्माण में अपने प्राणों और जवानी की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर सूबे की सियासत एक बार फिर सुलग उठी है। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने राज्य सरकार की कथित ‘वादाखिलाफी’ और आंदोलनकारियों की मांगों के प्रति उदासीनता के विरोध में 30 सितंबर को ‘संपूर्ण झारखंड बंद’ (चक्का जाम) का बड़ा ऐलान किया है। इस बंद को लेकर आदिवासी छात्र संगठनों, स्थानीयता समर्थक मोर्चों और विपक्ष के कुछ धड़ों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है।
आज शाम अलबर्ट एक्का चौक पर मचेगा ‘मशालों‘ का शोर
इस महा-बंद की पूर्व संध्या पर यानी आज (29 सितंबर) शाम 5 बजे राजधानी रांची सहित राज्य के तमाम प्रमुख संवेदनशील जिलों में भव्य मशाल जुलूस निकाला जा रहा है। रांची के शहीद चौक से शुरू होकर यह जुलूस शहर के हृदय स्थल अलबर्ट एक्का चौक तक पहुंचेगा, जहां सरकार के खिलाफ विरोध सभा आयोजित कर आम जनता से कल के बंद को ऐतिहासिक बनाने के लिए सहयोग मांगा जाएगा।
रांची के अलावा गुमला, सिमडेगा, पलामू, रामगढ़ और कोल्हान-सिंहभूम के सुदूरवर्ती ग्रामीण व शहरी इलाकों में बंद समर्थक जन-संपर्क अभियान चला रहे हैं। तमाड़ के आमलेशा मैदान में भी आंदोलनकारियों की विशेष महाबैठक के बाद डोड़ेया मोड़ तक मशाल मार्च निकालने की रणनीति तैयार की गई है।
आखिर क्यों बंद हो रहा है झारखंड? (प्रमुख मांगें)
मोर्चा के प्रधान सचिव पुष्कर महतो और वरिष्ठ किसान नेताओं के अनुसार, झारखंड सरकार स्थानीय मूलवासियों और राज्य गठन के नायकों के हितों को लगातार अनसुना कर रही है। वर्षों से लंबित आंदोलनकारियों की पहचान, उन्हें सम्मान राशि (पेंशन), नियोजन और बुनियादी अधिकार देने की मांग अधूरी है। राज्य के खनिज संसाधनों की लूट और विस्थापन के खिलाफ सख्त स्थानीय नीति (डोमिसाइल) लागू करने की मांग। तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में शत-प्रतिशत स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग।
आपातकालीन सेवाएं मुक्त, पुलिस अलर्ट पर
आंदोलनकारी मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल, एम्बुलेंस, दवा दुकानें, दूध सप्लाई और स्कूल-कॉलेज परीक्षा जैसी आवश्यक व आपातकालीन सेवाओं को बंद के दायरे से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। हालांकि, बंद के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर चक्का जाम की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। रांची, जमशेदपुर और धनबाद के प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े।















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