झाड़ग्राम। नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में झाड़ग्राम की अदालत ने दोषी लालमोहन मांडी (33) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर उसे एक महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने की मंजूरी दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झाड़ग्राम के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, द्वितीय न्यायालय ने बुधवार, 14 अक्टूबर को जामबोनी थाना के सामूहिक दुष्कर्म के मामले में यह फैसला सुनाया। दोषी लालमोहन मांडी जामबनी थाना क्षेत्र के गगनासुली गांव का निवासी है।
मामले की शुरुआत 8 नवंबर 2024 को दर्ज शिकायत से हुई थी। पीड़िता की मां ने जामबोनी थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि तालाब के पास बैठी उनकी नाबालिग बेटी को चार लोग जबरन पास के जंगल में ले गए। वहां उसके हाथ-पैर और मुंह बांधकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन किशोर आरोपियों और 33 वर्षीय लालमोहन मांडी को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने घटना के एक महीने के भीतर अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान दस गवाहों की गवाही सामने आई। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर लालमोहन मांडी को दोषी ठहराते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 और बीएनएस की धारा 70(2) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों धाराओं के तहत दी गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी।















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