पहली राज्य स्तरीय कार्यशाला, छह महीने की शुरुआती कार्ययोजना पर सहमति बनी, जोखिम वाले स्थानों की होगी पहचान
रांची। झारखंड में डूबने से होने वाली मौतों को रोकने की दिशा में पहली बार राज्य स्तर पर संगठित पहल की गई। इसके तहत सरकार के विभिन्न विभागों, तकनीकी संस्थाओं और विकास सहयोगियों को एक मंच पर लाकर राज्य कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड सरकार ने रांची में डूबने से बचाव पर पहली राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की। इस महत्वपूर्ण पहल के समन्वय में चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (सिनी) ने सहयोग किया। यह पहल हादसे के बाद केवल बचाव और राहत तक सीमित रहने के बजाय पहले से जोखिम पहचानने, जल स्रोतों को सुरक्षित बनाने, लोगों को तैयार करने और सरकारी विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर केंद्रित है।
यह कार्यशाला पूर्वी भारत में सिनी की महीने भर चली डूबने से बचाव पहल “यूनाइट टू टर्न द टाइड” के अंतर्गत आयोजित की गई। इस अभियान ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम में सरकारों, तकनीकी संस्थाओं, समुदायों और युवाओं को डूबने से होने वाली मौतों के खिलाफ एकजुट किया।
सिनी एक दशक से अधिक समय से समुदाय आधारित डूबने से बचाव कार्यक्रम लागू कर रहा है। इसका मॉडल विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सुझाए गए उपायों के अनुरूप है। इसमें जोखिम वाले जल स्रोतों के चारों ओर सुरक्षा घेरा, जल सुरक्षा और जीवनरक्षक तैराकी, सुरक्षित बचाव और सीपीआर प्रशिक्षण, जनजागरूकता तथा सरकारी व्यवस्थाओं के साथ समन्वय शामिल हैं।
कार्यशाला में चर्चा के बाद अगले छह महीनों के लिए शुरुआती कार्ययोजना पर सहमति बनी। राज्य में डूबने के अधिक जोखिम वाले स्थानों की पहचान की जाएगी। राज्य की आईईसी इकाई इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने में सहयोग करेगी। चुनिंदा क्षेत्रों में त्वरित सर्वेक्षण कर डूबने की वर्तमान स्थिति और स्थानीय जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने का प्रयास भी किया जाएगा।
पंचायती राज विभाग प्राथमिकता वाले खुले जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा अवरोध लगाने में सहयोग करेगा। फ्रंटलाइन कर्मियों और समुदाय के स्वयंसेवकों के लिए फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण तुरंत शुरू करने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी। इन शुरुआती कदमों से मिलने वाले प्रमाण और अनुभव झारखंड की व्यापक राज्य कार्ययोजना तैयार करने में मदद करेंगे।
सिनी में इंजरी प्रिवेंशन एवं नेशनल एडवोकेसी के लीड सुजॉय रॉय ने कहा, “झारखंड ने डूबने की समस्या को उन विभागों और संस्थानों के सामने रखा है, जो इसे रोकने की क्षमता रखते हैं। हमारा साझा लक्ष्य ऐसा झारखंड बनाना है, जहां किसी परिवार को ऐसी डूबने की घटना में अपने बच्चे या किसी अन्य सदस्य को न खोना पड़े, जिसे समय रहते रोका जा सकता था। यह कार्यशाला उस दिशा में एक मजबूत शुरुआत है।”













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