अशोक भद्र
झाड़ग्राम। प्रसिद्ध आदिवासी विद्वान, शिक्षाविद् एवं सांस्कृतिक चिंतक डॉ. रामदयाल मुंडा की जयंती झाड़ग्राम में बिरसा मुंडा अकादमी एवं सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग (I&CA) के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को मनाई गई। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में झाड़ग्राम के सांसद कालीपद सोरेन, विधायक लक्ष्मीकांत साऊ, सभाधिपति गौरी तलधी, एडीएम (I&CA), राज कॉलेज झाड़ग्राम के प्राचार्य सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भारी संख्या में मुंडा समुदाय के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. रामदयाल मुंडा के आदिवासी शिक्षा, शोध, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और भाषाओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मुंडारी लोकनृत्य रहा। लोक कलाकारों ने पारंपरिक मुंडारी लोकनृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया। रंगारंग प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया।
कार्यक्रम में मुंडा समुदाय के छात्र-छात्राओं की भागीदारी ने भी आदिवासी युवा पीढ़ी के अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव को दर्शाया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रामदयाल मुंडा के विचारों और उनके सांस्कृतिक योगदान को आगे बढ़ाने तथा आदिवासी भाषाओं, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया गया।













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