मजदूर वर्ग की स्थिति, चुनौतियों और वर्ग चेतना के विकास पर हुई विस्तृत चर्चा
आदित्यपुर। ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC), झारखंड राज्य कमिटी के तत्वावधान में “मजदूर वर्ग की स्थिति और चुनौतियाँ” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय श्रमिक प्रशिक्षण शिविर रविवार को आदित्यपुर रेलवे स्टेशन के समीप स्थित रेलवे इंस्टिट्यूट, आदित्यपुर में संपन्न हुआ। दो शिविर में झारखंड के लगभग सभी जिलों से AIUTUC के सदस्य एवं मजदूर प्रतिनिधि शामिल हुए।
शिविर के पहले सत्र में विभिन्न जिलों से आए मजदूर प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र एवं कार्यस्थलों में मजदूरों की वर्तमान स्थिति, समस्याओं और चुनौतियों को विस्तार से रखा। राज्य कमिटी के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरतापूर्वक सुना और मजदूरों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने पर जोर दिया।

वहीं दूसरे सत्र में मजदूरों की समस्याओं के समाधान के रास्तों पर चर्चा की गई। विभिन्न कंपनियों एवं अलग-अलग कार्यक्षेत्रों से आए मजदूर साथियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए संगठन को मजबूत करने और मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
श्रमिकों के अधिकार और हित को कमजोर करने की साजिश चल रही है
शिविर के अंतिम एवं महत्वपूर्ण सत्र को AIUTUC के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी कॉमरेड शंकर दास गुप्ता ने संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बनाई जा रही अनेक नीतियों का उद्देश्य मजदूरों के हितों की रक्षा के बजाय पूंजीपतियों के हितों को बढ़ावा देना है। उन्होंने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार को आसान बनाने के नाम पर श्रमिकों के अधिकारों और हितों को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने खान और खनिज विधेयक, 1957 में हुए संशोधनों का उदाहरण देते हुए कहा कि खनिज क्षेत्र में नीलामी की व्यवस्था से बड़े पूंजीपतियों को अधिक लाभ मिलने की स्थिति बनी है और छोटे कारोबारियों के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने इसे पूंजी के अधिकाधिक केंद्रीकरण की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अधिक से अधिक पूंजी कुछ ही हाथों में केंद्रित होना पूंजीवाद की मूल प्रवृत्ति है।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के शोषण के खिलाफ संगठित संघर्ष ही रास्ता है। सरकार कितनी भी निरंकुश क्यों न हो, संगठित और वैचारिक आंदोलन के माध्यम से जनता अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर सकती है। उन्होंने किसान आंदोलन सहित विभिन्न जन आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यापक और संगठित आंदोलन के दबाव में सरकारों को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि मजदूर हितों के खिलाफ बनाए गए कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखना होगा। साथ ही उन्होंने पूरे झारखंड में मजदूरों के बीच वर्ग चेतना, संगठनात्मक चेतना और बेहतर चरित्र निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं के चरित्र निर्माण पर जोर
अपने संबोधन में कॉमरेड ने संगठन को मजबूत करने के लिए नए लोगों को जोड़ने, उन्हें शिक्षित एवं सक्रिय कार्यकर्ता बनाने तथा कार्यकर्ताओं के चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन में पद प्राप्त करना लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि संगठन को मजबूत करना और आम जनता एवं मजदूरों के बीच विश्वास कायम करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
शिविर के दौरान मंच पर कॉमरेड अमर चौधरी, जयसेन मेहर, लिली दास, आशीष कुमार धर, राज्य अध्यक्ष आर. एस. शर्मा एवं सचिव राजीव तिवारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विष्णु देव गिरी, अनिल बावड़ी, आशीष कुमार धर, आसुदेव महतो, दिलीप कुमार, आशीष कुमार घोष, राजू कुमार, नूनीवाला देवी, हाबूलाल महतो, सुभाष प्रमाणिक, जितेंद्र ठाकुर, विशाल कुमार बर्मन, रोहित कुमार, संतोष कुमार, कौशिक घोष सहित अनेक साथियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।













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