जमशेदपुर। अधिवक्ता विकास चंद्रा ने झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर “कैफोर्ड हाउस” को बचाने के लिए विकास चंद्रा ने किया रांची हाईकोर्ट में जनहीत याचिका (PIL) दायर की है। शनिवार को मीडिया से संवाद करते हुए विकास ने कहा कि झारखंड की एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर—रांची स्थित ब्रिटिश कालीन मुख्यमंत्री आवास (कैफोर्ड हाउस)—को ध्वस्त किए जाने के खिलाफ मेरी यह लड़ाई है।
उन्होंने बताया कि रांची स्थित वर्ष 1884 में निर्मित ऐतिहासिक मुख्यमंत्री आवास (कैफोर्ड हाउस), जो कि 140 वर्षों से अधिक पुरानी औपनिवेशिक वास्तुकला की एक महत्वपूर्ण धरोहर है, को ध्वस्त किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। यह भवन न केवल ऐतिहासिक और स्थापत्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि यह झारखंड के प्रशासनिक इतिहास का भी एक अभिन्न हिस्सा रहा है। यह छोटानागपुर क्षेत्र के पहले कमिश्नर के आवास के रूप में स्थापित हुआ था तथा बाद में यह भवन झारखंड के अनेक मुख्यमंत्रियों द्वारा उपयोग में लाया जाता रहा है। किसी भी देश और राज्य की ऐतिहासिक धरोहरें उसकी पहचान, गौरव और संस्कृति की आत्मा होती हैं। ये केवल ईंट और पत्थर नहीं, बल्कि हमारे इतिहास, कला, वास्तुकला और सभ्यता के जीवंत प्रमाण हैं।
भवन निर्माण विभाग द्वारा उक्त ऐतिहासिक भवन को असुरक्षित बताकर ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया है। तथा ध्वस्तीकरण कार्य प्रारंभ/प्रक्रियाधीन है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस ऐतिहासिक भवन को ध्वस्त किया जा रहा है, जबकि इसका संरक्षण किया जाना चाहिए था।सरकार द्वारा इसे असुरक्षित बताकर ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया है और नया भवन बनाने की योजना है।
परंतु बिना ऐतिहासिक मूल्यांकन और बिना आवश्यक स्वीकृतियों के ऐसा करना अत्यंत चिंताजनक है।
भवन को ध्वस्त करने से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राज्य विरासत आयोग, रांची नगर निगम, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से अनुमति नहीं ली गई। जो Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958 (संशोधित 2010) का उल्लंघन है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार, राज्य का कर्तव्य है कि वह ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा करे।इस धरोहर को ध्वस्त करना इस दायित्व के विपरीत है।
अधिवक्ता विकास चंद्रा ने कहा कि इस ऐतिहासिक भवन के संरक्षण के लिए अधीक्षण पुरातत्वविद् रांची, भवन निर्माण विभाग, परियोजना भवन, धुर्वा, मुख्य सचिव झारखंड, डिप्टी कमिश्नर, रांची को आवेदन दिया गया। लेकिन अब तक ना तो कोई उत्तर प्राप्त हुआ और ना ही कार्रवाई हुई। थक हार कर मैंने 16 जून 2026 को रांची हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। मेरी यह लड़ाई जारी रहेगी।













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