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ग्राउंड रिपोर्ट: छावनी बनी लुटियंस दिल्ली; चप्पे-चप्पे पर पहरा, इंटरनेट ठप और थम गए मेट्रो के पहिए

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नई दिल्ली। “आप आगे नहीं जा सकते, यहां धारा 144 लागू है।” यह वो जुमला है जो आज सुबह से नई दिल्ली और लुटियंस ज़ोन की तरफ बढ़ने वाले हर नागरिक को सुनने को मिल रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर बुलाए गए महाप्रदर्शन के मद्देनजर देश की राजधानी आज एक अभूतपूर्व प्रशासनिक घेराबंदी का सामना कर रही है। ऐसा लग रहा है मानो पूरी दिल्ली को किसी किले में तब्दील कर दिया गया है।

सूनी सड़कें, बंद स्टेशन: थम गई रफ्तार

जमीनी हकीकत यह है कि लुटियंस दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस, पटेल चौक और जंतर-मंतर के आस-पास का इलाका पूरी तरह से सन्नाटे में डूबा है। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 45 प्रमुख स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। जो स्टेशन कभी लाखों यात्रियों की आवाजाही से गुलजार रहते थे, वहां आज केवल भारी पुलिस बल और सन्नाटा पसरा है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की तरफ जाने वाले रास्तों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हैं क्योंकि हर बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।

डिजिटल ब्लैकआउट: संपर्क से कटी राजधानी

ग्राउंड ज़ीरो पर सबसे बड़ी परेशानी डिजिटल कनेक्टिविटी की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के 4 किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस डिजिटल ब्लैकआउट के कारण आम राहगीरों को न ऑनलाइन पेमेंट करने में मदद मिल रही है और न ही वे जीपीएस (GPS) का इस्तेमाल कर पा रहे हैं। कई दुकानदारों और दफ्तर जाने वाले लोगों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन को रोकने के नाम पर आम जनता को बंधक बना दिया गया है।

हिरासत का दौर और पसरा तनाव

कनॉट प्लेस और जनपथ के पास सुबह से ही प्रदर्शनकारियों की टोलियां पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस की बसें लगातार हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर जाती दिख रही हैं। कई छात्र संगठनों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं को बैरिकेड्स की कई परतों को पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

लुटियंस दिल्ली की यह ग्राउंड रिपोर्ट साफ बयां करती है कि भले ही सड़कों पर आंदोलनकारियों की भीड़ को जमा होने से रोक दिया गया हो, लेकिन इस प्रशासनिक सख्ती ने पूरी दिल्ली में एक अनजाना डर और भारी तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। आम लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ देखी जा सकती है।

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