JHAHIN/2014/58773

36 वर्षों से न्याय की आस में टाटा स्टील के मजदूर, नौकरी नहीं तो सेटलमेंट की मांग; JKLM ने दिया आंदोलन तेज करने का संकेत

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जमशेदपुर। टाटा स्टील में वर्ष 1981 में कार्यरत रहे सैकड़ों मजदूर पिछले 36 वर्षों से अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन मजदूरों की मांग है कि कंपनी उन्हें स्थायी नौकरी दे या फिर उचित सेटलमेंट के माध्यम से उनका बकाया अधिकार सुनिश्चित करे। इतने लंबे समय बाद भी मांग पूरी नहीं होने से मजदूरों में नाराजगी है।

मजदूरों के अनुसार, वर्ष 1981 में जब कंपनी में श्रमिकों की कमी थी, उस समय उन्होंने दिन-रात मेहनत कर कंपनी के उत्पादन और कामकाज को जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका दावा है कि इन मजदूरों की मेहनत के कारण ही कंपनी का काम प्रभावित होने से बचा। इसके बाद वर्ष 1990 में लगभग 1,600 मजदूरों को स्थायी रूप से बहाल किया गया, लेकिन सैकड़ों अन्य मजदूरों को स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी और उन्हें काम से बाहर कर दिया गया।

आश्वासन मिला, लेकिन मांग आज तक अधूरी

प्रभावित मजदूरों का कहना है कि उन्हें भी स्थायी करने और वेतन देने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद उनकी मांग पूरी नहीं हुई। कुछ मजदूरों के पास आज भी कंपनी के गेट पास मौजूद होने की बात कही जा रही है। मजदूर इसे अपने लंबे कार्यकाल और कंपनी के साथ जुड़े रहने का प्रमाण बताते हैं।

मजदूरों का आरोप है कि आश्वासन पूरा नहीं होने के कारण उन्हें वर्षों से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ अब नियमित नौकरी मिलने की उम्मीद कमजोर होती जा रही है, लेकिन उन्हें उचित आर्थिक सहायता और सेटलमेंट मिलने का अधिकार जरूर मिलना चाहिए।

JKLM ने न्याय दिलाने का किया दावा

अब इस मामले में JKLM ने भी आवाज उठाई है। संगठन का कहना है कि प्रभावित मजदूरों को किसी भी कीमत पर न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा। JKLM के अनुसार, मजदूरों की उम्र को देखते हुए अब नौकरी के बजाय उचित सेटलमेंट एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। संगठन ने संकेत दिया है कि यदि मजदूरों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो उनके हक के लिए बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन की मांग

दशकों से संघर्ष कर रहे इन मजदूरों की मांग अब केवल नौकरी तक सीमित नहीं रह गई है। वे चाहते हैं कि उनके वर्षों के योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित आर्थिक लाभ मिले, ताकि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

अब देखना होगा कि टाटा स्टील प्रबंधन इस लंबे समय से लंबित मामले पर क्या रुख अपनाता है और प्रभावित मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। 36 वर्षों से जारी इस संघर्ष का समाधान कब निकलेगा, यह सवाल आज भी बरकरार है।

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