JHAHIN/2014/58773

बधिरजनों के समावेशन को बढ़ावा देने के लिए टाटा स्टील फाउंडेशन, ISLRTC और CRC रांची ने की साझेदारी

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जमशेदपुर/रांची। टाटा स्टील फाउंडेशन, इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (ISLRTC) और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले कंपोजिट रीजनल सेंटर (CRC), रांची ने एक समझौता पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत तीनों संस्थान सबल-संकेत पहल के लिए मिलकर काम करेंगे। इस पहल का उद्देश्य बधिरजनों के समावेशन को बढ़ावा देना और भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।

इस साझेदारी का उद्देश्य बधिर और कम सुनने वाले लोगों को होने वाली संवाद संबंधी कठिनाइयों को दूर करना है। इसके लिए पेशेवरों और समुदायों के बीच सांकेतिक भाषा के कौशल को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल के तहत, टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) के 10 मास्टर ट्रेनर्स को भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) का प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इससे प्रशिक्षित लोगों की एक टीम तैयार होगी, जो जागरूकता बढ़ाने, दूसरों को प्रशिक्षण देने और बधिरजनों के लिए अधिक समावेशी माहौल बनाने में मदद करेगी।
सबल-संकेत का एक प्रमुख उद्देश्य कार्यस्थल पर बधिरजनों के लिए समावेशी माहौल तैयार करना है। इसके तहत, टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) के कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इनके ज़रिए कर्मचारियों को भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) की बुनियादी जानकारी दी जाएगी, बधिरजनों की संस्कृति को समझने में मदद की जाएगी और बातचीत के ऐसे तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिन्हें सभी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा, तीनों संस्थान मिलकर सीखने-सिखाने के मॉड्यूल और सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री भी तैयार करेंगे, ताकि लोग लगातार सीख सकें और इस पहल का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके।
 इस समझौता पर ISLRTC के निदेशक राजू, CRC रांची के निदेशक सूर्यमणि प्रसाद और टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर स्किल डेवलपमेंट, सबल एंड स्पोर्ट्स के हेड अमिताभ भी उपस्थित थे। 

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