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टाटा स्टील की खेल पहलों से निखर रहीं खेल प्रतिभाएं, एशियन गेम्स 2026 में रचा इतिहास

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जमशेदपुर। चैंपियन सिर्फ पोडियम पर नहीं बनते, बल्कि उनके पीछे अभ्यास के अनगिनत घंटे और अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने का जज़्बा होता है। इसी सोच के साथ टाटा स्टील दशकों से भारतीय खेलों को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान देने में जुटी है। कंपनी सिर्फ चैंपियन तलाशती नहीं है, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करती है जहाँ जमीनी स्तर की खेल प्रतिभाएं खुद चैंपियन बनकर उभरती हैं। टाटा स्टील की इस अनूठी खेल संस्कृति का सबसे बड़ा प्रमाण हाल ही में संपन्न हुए एशियन गेम्स 2026 (आइची-नागोया) में देखने को मिला।

वर्ष 1996 में स्थापित टाटा आर्चरी अकादमी आज देश में तीरंदाजी की रीढ़ बन चुकी है। इस संस्था ने अब तक देश को 9 ओलंपियन और 9 अर्जुन पुरस्कार विजेता दिए हैं। एशियाई खेलों में सफलता का जो सफर 2006 में जयंत तालुकदार के कांस्य पदक से शुरू हुआ था, वह वर्ष 2026 में इतिहास रचने तक पहुंच गया। अकादमी की होनहार तीरंदाज अंकिता भकत ने एशियन गेम्स 2026 में भारत की स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला रिकर्व टीम का हिस्सा बनकर इस सुनहरी विरासत को आगे बढ़ाया। कांस्य से स्वर्ण तक का यह सफर टाटा स्टील के सही मार्गदर्शन और लगातार मिलने वाली विश्वस्तरीय सुविधाओं को दर्शाता है।

तीरंदाजी के साथ-साथ टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (TSAF) के माध्यम से स्पोर्ट क्लाइंबिंग के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व सफलता मिली है। वर्ष 2015 से अब तक 16 जमीनी केंद्रों के माध्यम से लगभग 1,000 युवाओं को इस खेल से जोड़ा जा चुका है। इसका सीधा असर एशियन गेम्स 2026 में दिखा, जहाँ साधारण आदिवासी परिवार से आने वाले जोगा पूर्ति और दीपु मल्लेश ने स्पीड क्लाइंबिंग के फाइनल राउंड में जगह बनाई। इस दौरान जोगा ने 7.28 सेकंड और दीपु ने 5.09 सेकंड का समय लेकर नया भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया। थाईलैंड के विशेष कोच की देखरेख में मिले अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण ने इन खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को इतना बढ़ा दिया है कि अब लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक खेल इनका वास्तविक लक्ष्य बन चुके हैं।

जमशेदपुर, क्योंझर और भुवनेश्वर में विकसित विशेष खेल सुविधाओं के साथ-साथ टाटा स्टील स्पोर्ट्स साइंस, पोषण, फिजियोथेरेपी और बायोमैकेनिकल एनालिसिस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बना रही है। जमशेदपुर में एशियन किड्स और एशियन यूथ क्लाइंबिंग चैंपियनशिप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन से भारतीय खेलों के भविष्य को एक नया आकार मिल रहा है।

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