25 सितंबर की बैठक के बाद हेमंत सोरेन चल सकते हैं बड़ा सियासी दांव
रांची। झारखंड की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार में एक बार फिर बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की सुगबुगाहट बेहद तेज हो गई है। रांची के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि 25 सितंबर को होने वाली कैबिनेट की अहम बैठक के बाद मुख्यमंत्री अपने पत्तों का राज खोल सकते हैं। इस संभावित फेरबदल का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावी और प्रशासनिक समीकरणों को साधकर अपनी पकड़ और मजबूत करना माना जा रहा है।
नए चेहरों को मिल सकती है जगह, मंत्रियों के विभागों में होगा बदलाव
मंत्रालयी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार का फेरबदल केवल औपचारिक नहीं, बल्कि काफी व्यापक हो सकता है। सरकार के कुछ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद उनके विभागों में बड़ा फेरबदल किया जा सकता है। वहीं, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कुछ नए और युवा चेहरों को कैबिनेट में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। कुछ मंत्रियों के खराब परफॉर्मेंस की रिपोर्ट को देखते हुए उनकी छुट्टी भी की जा सकती है, जिससे गठबंधन के अन्य विधायकों में जगह पाने की होड़ मच गई है।
25 सितंबर की बैठक पर टिकी सबकी नजरें
25 सितंबर को प्रोजेक्ट भवन में होने वाली कैबिनेट की बैठक को बेहद संवेदनशील और नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि इस बैठक में न केवल राज्य हित से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगेगी, बल्कि बैठक के तुरंत बाद नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण या विभागों के री-एलोकेशन (पुनर्आवंटन) का आधिकारिक ऐलान भी हो सकता है। मुख्यमंत्री आवास में सहयोगी दलों (कांग्रेस और राजद) के शीर्ष नेताओं के साथ भी इस विषय पर गुपचुप बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।
दिवंगत मंत्रियों के परिजनों को तरजीह देने की संभावना
विश्वसनीय राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हेमंत सोरेन सरकार इस फेरबदल में सहानुभूति कार्ड और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी। इस रेस में सबसे पहला और मजबूत नाम श्वेता शर्मा का चल रहा है। श्वेता शर्मा दिवंगत मंत्री और झामुमो के कद्दावर नेता सुदिव्य सोनू की पत्नी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी उनके प्रति जनता की सहानुभूति को भुनाने के लिए उन्हें कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस
इसके अलावा, दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के निधन से खाली हुई सीट और कोल्हान-संथाल क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए झामुमो के ही एक अन्य वरिष्ठ विधायक के नाम पर भी शीर्ष स्तर पर सहमति बनने की चर्चा है। सहयोगी दल कांग्रेस के कोटे से भी एक नए चेहरे को शामिल किए जाने या मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदलकर संगठन से जुड़े किसी कद्दावर विधायक को एडजस्ट करने की बात चल रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा अंतिम सूची को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है और 25 सितंबर की शाम तक ही इन नामों पर अंतिम आधिकारिक मुहर लगेगी।
सियासी गलियारों में मची हलचल
इस खबर के बाहर आते ही सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के भीतर दावेदारों ने अपनी-अपनी गोटियां सेट करना शुरू कर दिया है। मंत्रियों की रेस में शामिल कई विधायक इस समय रांची से लेकर दिल्ली तक बड़े नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत सोरेन का यह कदम असंतोष को थामने और चुनाव से ठीक पहले अपनी टीम को एक नया व प्रभावी रूप देने का आखिरी बड़ा मौका हो सकता है।









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