रांची/कानपुर: देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET PG 2026 के परिणाम घोषित होते ही झारखंड का नाम राष्ट्रीय पटल पर चमक उठा है। रांची में जन्मीं और वर्तमान में भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर डॉ. पल्लाक्षी प्रसाद ने राष्ट्रीय स्तर पर ऑल इंडिया रैंक 2 (AIR-2) हासिल कर एक अभूतपूर्व इतिहास रच दिया है। उनकी इस स्वर्णिम सफलता के बाद झारखंड के प्रशासनिक, सैन्य और चिकित्सा महकमों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
कठिन ड्यूटी के साथ हासिल किया मुकाम
डॉ. पल्लाक्षी प्रसाद वर्तमान में एयर फोर्स स्टेशन, कानपुर में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। एक सैन्य अधिकारी के रूप में अपनी चुनौतीपूर्ण और अनुशासित ड्यूटी को बखूबी निभाते हुए उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी की। डॉ. पल्लाक्षी ने 720 में से कुल 633 अंक अर्जित किए हैं, जो ऑल इंडिया टॉपर से महज 8 अंक कम हैं। एक वर्किंग प्रोफेशनल और सैन्य अधिकारी के रूप में दिन-रात देश की सेवा करते हुए ऐसी सफलता पाना देश के लाखों युवाओं और मेडिकल एस्पिरेंट्स के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
बचपन से ही मेधावी और अनुशासित
पुणे के प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री हासिल करने वाली पल्लाक्षी हमेशा से ही मेधावी रही हैं। उन्होंने हैदराबाद के डीपीएस स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की, जहां वह हेड गर्ल भी थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दोनों इंजीनियर हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा पल्लाक्षी के डॉक्टर बनने के सपने का पूरा समर्थन किया। वह अपने परिवार की इकलौती सदस्य हैं जिन्होंने न सिर्फ चिकित्सा के क्षेत्र को चुना, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों (Armed Forces) में शामिल होकर देश सेवा का भी संकल्प लिया।
चुनौतियों को मात देकर पाई सफलता
डॉ. पल्लाक्षी का मानना है कि मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए काम और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना समय के साथ एक दौड़ की तरह होता है। उन्होंने किसी जादुई फॉर्मूले पर भरोसा करने के बजाय अपनी पेशेवर प्रतिबद्धताओं के बीच एक मजबूत और अनुशासित अध्ययन प्रणाली बनाई, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। उनकी इस सफलता पर डायरेक्टर जनरल आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (DGAFMS) ने भी उन्हें विशेष बधाई दी है. झारखंड के मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी डॉ. पल्लाक्षी को बधाई देते हुए इसे पूरे राज्य के लिए परम गौरव का क्षण बताया है।
















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