कोलकाता। मंच पर अकेले कलाकार और सामने खामोश बैठे दर्शक। जैसे-जैसे पश्चिम सिंहभूम के चक्रधरपुर निवासी प्रख्यात रंगकर्मी एवं कथावचक दिनकर शर्मा ने एडगर एलन पो की ‘दिल की आवाज’ के पात्रों और प्रसंगों को अपने अभिनय से जीवंत किया, सभागार की खामोशी गहरी होती गई। प्रस्तुति खत्म होते ही तालियों की गड़गड़ाहट ने बता दिया कि एकल अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है।
ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर गड़िया में ‘अन्य मुख नाट्य दल’ की ओर से आयोजित नाट्य संध्या में कथावाचक एवं रंगकर्मी दिनकर शर्मा ने यह एकल प्रस्तुति दी। संवाद अदायगी, आंगिक अभिनय और भाव-भंगिमाओं के जरिए उन्होंने गंभीर कथानक को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।
स्थानीय दर्शकों ने कहा कि बिना किसी सह-कलाकार के पूरी कहानी को इस तरह जीवंत करना रंगमंच की शक्ति का अहसास कराता है। उनका कहना था कि तकनीक के दौर में ऐसी प्रस्तुतियां दर्शकों को फिर से रंगमंच के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने दिनकर शर्मा के अभिनय की सराहना की। दिनकर शर्मा ने आयोजन और प्रस्तुति का अवसर देने के लिए ‘अन्य मुख नाट्य दल’ के प्रति आभार जताया।













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