नई दिल्ली/मुंबई। देश की राजधानी और आर्थिक राजधानी इस समय बड़े राजनीतिक टकराव का केंद्र बनी हुई हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों और नागरिक संगठनोंके देशव्यापी आह्वान के बाद आज दिल्ली और मुंबई की सड़कों पर भारी हंगामा और महाप्रोटेस्ट देखने को मिल रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने संवेदनशील इलाकों को पूरी तरह से सील कर दिया है और जंतर-मंतर को छावनी में तब्दील कर दिया है, वहीं मुंबई में भी पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने हैं।
दिल्ली में विपक्ष के बड़े नेता और प्रदर्शनकारी हिरासत में
सुबह से ही दिल्ली के जंतर-मंतर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद जब विपक्ष के कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग आगे बढ़े, तो पुलिस ने सख्त कार्रवाई की।
पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सांसद संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज सहित विपक्ष के कई बड़े नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 500 से 700 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों और अस्थाई शिविरों में ले जाया गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: 12 मेट्रो स्टेशन और इंटरनेट बंद
प्रदर्शन की आंच दिल्ली के अन्य हिस्सों तक न फैले, इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद कड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय दिल्ली और हाई-सिक्योरिटी जोन से जुड़ने वाले 12 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके अलावा, अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए कई संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई है। दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की गई है।
मुंबई की सड़कों पर उतरा विपक्ष, दक्षिण मुंबई में भारी जाम
दिल्ली के साथ-साथ देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी इस महाप्रोटेस्ट का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ‘सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस’ और महाविकास अघाड़ी के विभिन्न घटक दलों के कार्यकर्ता सुबह से ही सड़कों पर उतर आए हैं। दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान और चुनाव आयोग के क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मुंबई पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई जगहों पर बैरिकेडिंग की है, जिससे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और दादर के आस-पास के इलाकों में भीषण ट्रैफिक जाम लग गया है। मुंबई में भी कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर है।
आखिर क्यों हो रहा है यह देशव्यापी विरोध?
यह पूरा विवाद हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के बाद गहराया है, जिसमें यह दावा किया गया था कि चुनाव आयोग की ‘विशेष गहन समीक्षा’ प्रक्रिया के दौरान देश भर में करीब 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
विपक्षी दलों और छात्र आंदोलन का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में मतदाता सूचियों में जानबूझकर हेरफेर की गई है। विपक्ष का कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। विपक्षी गठबंधन और युवाओं का यह संगठन मुंबई से लेकर दिल्ली तक सड़कों पर उतरकर मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहा है।
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों और मतदाता सूची में गड़बड़ी के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानून के दायरे में रहकर किया गया है ताकि फर्जी और स्थानांतरित मतदाताओं को हटाया जा सके। बहरहाल, इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है और आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने के आसार हैं।
















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