JHAHIN/2014/58773

लेडी मेहरबाई टाटा: अपने समय से आगे की सोच

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जमशेदपुर। इतिहास ऐसे लोगों को हमेशा याद रखता है, जिनकी सोच अपने समय से आगे होती है। लेडी मेहरबाई टाटा ऐसी ही एक प्रेरणादायी महिला थीं। समाज सुधारक, खिलाड़ी, संगीत प्रेमी, यात्राप्रेमी और परोपकारी के रूप में उन्होंने ऐसे मुद्दों के लिए आवाज उठाई, जो उस समय से कई दशक आगे की सोच थी। टाटा की विरासत के साथ-साथ भारतीय समाज पर भी उनका गहरा और स्थायी प्रभाव रहा।

उनका जीवन टाटा स्टील की कहानी से भी गहराई से जुड़ा था। 1920 के दशक में जब टाटा स्टील एक बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब वह सर दोराबजी टाटा के साथ मजबूती से खड़ी रहीं। कंपनी को इस मुश्किल समय से निकालने के लिए सर दोराबजी ने अपनी निजी संपत्ति तक दांव पर लगा दी थी। इसमें मेहरबाई का बेहद प्रिय जुबली डायमंड भी शामिल था। यह उनके विश्वास और त्याग की मिसाल थी। इस फैसले ने टाटा स्टील को संभलने का मौका दिया और आगे चलकर यही कंपनी भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाते हुए एक वैश्विक कंपनी बनी।

जुबली डायमंड की कहानी इसके बाद भी जारी रही। सर दोराबजी और लेडी मेहरबाई के निधन के बाद इस हीरे को बेच दिया गया। इससे मिली रकम सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट को दी गई, जिसने शिक्षा, स्वास्थ्य, वैज्ञानिक अनुसंधान, ग्रामीण विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों को आगे बढ़ाया।

मेहरबाई का योगदान टाटा स्टील से कहीं आगे तक था। वह महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों की मजबूत समर्थक थीं। उन्होंने नेशनल काउन्सिल ऑफ़ वूमेन की स्थापना में अहम भूमिका निभाई और भारत को अंतरराष्ट्रीय महिला परिषद से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने, पर्दा प्रथा खत्म करने और छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई।

मेहरबाई एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी भी थीं। वेस्टर्न इंडिया टेनिस टूर्नामेंट में उन्होंने तीनों खिताब अपने नाम किए और अपने करियर में 60 से ज्यादा ट्रॉफियां हासिल कीं। उन्हें मोटरगाड़ियों का भी शौक था और वह दुनिया के कई हिस्सों में घूमीं। बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक, उन्होंने महिलाओं के जीवन को करीब से देखा और उनके लिए बेहतर अवसर, सम्मान और बेहतर जीवन की दिशा में काम किया।

उनकी विरासत आज भी कई संस्थानों और उनके काम में दिखाई देती है। 18 जून 1931 को उनके निधन के करीब एक सदी बाद भी, उनकी स्मृति में स्थापित टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल भारत के प्रमुख कैंसर उपचार, अनुसंधान और शिक्षा केंद्रों में से एक है। यह अस्पताल आज भी अनगिनत मरीजों और उनके परिवारों को इलाज और उम्मीद दे रहा है।

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