JHAHIN/2014/58773

‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना और प्रेरणा

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मेदिनीपुर कॉलेज में एबीआरएसएम के उच्च शिक्षा प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय संगोष्ठी

मेदिनीपुर। ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना और प्रेरणा का प्रतीक है। इसी विषय को केंद्र में रखते हुए ‘एबीआरएसएम (उच्च शिक्षा)’, पश्चिम मेदिनीपुर की पहल पर मेदिनीपुर कॉलेज के रानी शिरोमणि सभागार में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी आयोजित की गई।

संगोष्ठी की शुरुआत सुबह 11 बजे सरस्वती वंदना, दीप प्रज्ज्वलन और वंदे मातरम् गायन के साथ हुई। कार्यक्रम में मेदिनीपुर, नारायणगढ़ और दांतन विधानसभा क्षेत्रों के विधायक डॉ. शंकर कुमार गुच्छैत, रामप्रसाद गिरी और अजीत कुमार जाना सम्मानित वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता के रूप में विद्यासागर विश्वविद्यालय के बांग्ला विभाग के प्रोफेसर डॉ. बाणीरंजन दे ने विचार रखे। असम विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर अनूप कुमार दे ने विशेष वक्तव्य दिया। मेदिनीपुर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. असित पांडा भी आमंत्रित वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने ‘वंदे मातरम्’ गीत और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की स्वदेश चेतना, देश-विभाजन तथा वर्तमान समाज में राष्ट्रीय भावना की आवश्यकता और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

संगोष्ठी में पश्चिम मेदिनीपुर के विभिन्न कॉलेजों के करीब 200 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान 15 शोधकर्ताओं ने अपने शोध कार्य और महत्वपूर्ण विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इसके बाद कल्याण मंत्रोच्चार और आयोजन समिति के संयोजक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

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