रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। रांची की विशेष PMLA (प्रवर्तन निदेशालय) अदालत ने बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सोमवार (21 सितंबर) अनिवार्य रूप से कोर्ट में हाजिर होने का कड़ा निर्देश दिया है। अदालत में यह हाजिरी इस मामले में औपचारिक आरोप गठन की प्रक्रिया को लेकर होनी है।
शनिवार की निर्धारित पेशी में नहीं पहुंचे थे सीएम
इस मामले में शनिवार (19 सितंबर) को ही विशेष अदालत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए जाने थे। लेकिन अपनी व्यस्त प्रशासनिक व संवैधानिक व्यस्तताओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री शनिवार को कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद उनके कानूनी सलाहकारों ने अदालत से अगली तारीख की गुहार लगाई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए समय तो दे दिया, लेकिन सख्त निर्देश जारी कर कहा कि सोमवार शाम 4:00 बजे तक उनकी उपस्थिति अनिवार्य होगी।
कोर्ट ने दी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल पेशी) की छूट
राहत की बात यह है कि मुख्यमंत्री के व्यस्त कार्यक्रमों को देखते हुए विशेष PMLA अदालत ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल मोड) के जरिए भी पेश होने की छूट प्रदान की है। यानी मुख्यमंत्री चाहे तो व्यक्तिगत रूप से शारीरिक तौर पर कोर्ट रूम में उपस्थित हो सकते हैं या फिर डिजिटल माध्यम से जुड़कर इस कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
झारखंड हाई कोर्ट से पहले ही लग चुका है बड़ा झटका
विशेष अदालत की यह तल्ख हिदायत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से तगड़ा झटका लगने के ठीक बाद आई है। दरअसल, हेमंत सोरेन ने निचली अदालत द्वारा अपनी डिस्चार्ज पिटीशन (मामले से बरी करने की याचिका) खारिज किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और निचली अदालत में आरोप गठन की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी इस अंतरिम याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिससे विशेष अदालत में आरोप तय करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
क्या है पूरा बड़गाईं जमीन मामला?
यह पूरा विवाद रांची के बड़गाईं अंचल स्थित 8.86 एकड़ के एक बड़े भूखंड के कथित अवैध अधिग्रहण, कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के सहारे हस्तांतरण से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इस जमीन का हेरफेर अवैध तरीकों से किया गया था और इससे भारी मात्रा में ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध की कमाई) अर्जित की गई। इसी सिलसिले में लंबी पूछताछ के बाद जनवरी 2024 में ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद वे करीब 5 महीने तक जेल में रहे और बाद में उन्हें जमानत (बेल) मिली थी।
अब सोमवार को होने वाली इस बहुप्रतीक्षित सुनवाई पर पूरे राज्य की राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि अदालत इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपों पर बहस के बाद अगली रूपरेखा तय करेगी।















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