आईविजन व्यूरो
पटना। बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़े सियासी भूचाल और उलटफेर की सुगबुगाहट तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता को लेकर हाल में दिए गए एक बयान के बाद सूबे का राजनीतिक पारा अचानक चरम पर पहुंच गया है। इस वैचारिक मतभेद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सभी वरिष्ठ मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) के साथ एक आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस अचानक बुलाई गई बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा काबाजार गर्म हो गया है कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर कोई बड़ी ‘पलटी’ मारने की तैयारी कर रहे हैं।
अमित शाह के किस बयान पर भड़की JDU?
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक राष्ट्रीय मंच से दो टूक कहा था कि केंद्र सरकार देश भर में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे जल्द ही अमलीजामा पहनाया जाएगा।
भाजपा के इस कोर एजेंडे पर जेडीयू का रुख हमेशा से अलग रहा है। नीतीश कुमार पहले भी कई बार कह चुके हैं कि यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी धर्मों, संप्रदायों और राज्यों के साथ व्यापक आम सहमति बनाई जानी चाहिए, इसे थोपा नहीं जा सकता। अमित शाह के इस आक्रामक रुख को जेडीयू ने गठबंधन धर्म के खिलाफ माना, जिसके तुरंत बाद नीतीश कुमार एक्शन मोड में आ गए।
एक-एक विधायक से नीतीश ने की वन-टू-वन बात
नीतीश कुमार के आवास पर हुई इस गोपनीय और आपातकालीन बैठक में जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ जमीनी स्तर के विधायकों की नब्ज टटोली गई। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने पार्टी के नेताओं से साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पार्टी की मूल विचारधारा और धर्मनिरपेक्ष छवि से समझौता नहीं करेंगे। बैठक में मौजूद कई विधायकों ने भी दबी जुबान में स्वीकार किया कि बिहार में भाजपा के बढ़ते आक्रामक तेवरों के कारण उनके पारंपरिक वोट बैंक (विशेषकर अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग) में गलत संदेश जा रहा है। नीतीश ने सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में मुस्तैद रहने और किसी भी राजनीतिक परिस्थिति के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।
राजनीतिक गलियारों में ‘पलटीमार‘ चर्चाएं हुईं तेज
नीतीश कुमार के इस कदम के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक विश्लेषकों के कान खड़े हो गए हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी नीतीश कुमार सहयोगियों से नाराज होते हैं या बड़ा फैसला लेने वाले होते हैं, तो वे इसी तरह की आपातकालीन बैठकें बुलाते हैं। सोशल मीडिया पर भी यह खबर शीर्ष पर ट्रेंड कर रही है कि क्या बिहार में ‘पलटीमार पार्ट-2’ की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है? क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पाला बदलकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं?
भाजपा बैकफुट पर, डैमेज कंट्रोल में जुटे नेता
जेडीयू की इस तल्खी को देखते हुए बिहार भाजपा के शीर्ष नेता तुरंत डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। प्रदेश नेतृत्व की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि एनडीए गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और सरकार को कोई खतरा नहीं है। हालांकि, अंदरखाने में जेडीयू और बीजेपी के बीच की यह दरार अब खुलकर सामने आ चुकी है। आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि नीतीश कुमार का अगला कदम सूबे की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।









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